हल्द्वानी।… उत्तराखंड की उच्च शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. इंदिरा हृदयेश राज्य के युवाओं को पढ़ने के लिए उत्तराखंड से बाहर जाने की बात कह रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के कथन को दोहराते हुए कहा कि अगर राज्य के युवा कुछ करना या बनना चाहते हैं तो उन्हें बाहर जाकर पढ़ना होगा, राज्य में रहकर वे कुछ नहीं कर सकते।

डॉ. इंदिरा हृदयेश का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत को अब घोषणाएं करना बंद करने को कहा है। उन्होंने कहा, 15 साल पहले जब उत्तराखंड अलग राज्य बना था, तब केवल 25 कॉलेज थे और अब 95 हो गए हैं। केवल कॉलेज खुलना ही सब कुछ नहीं है।

डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा, अगर एक्सपोजर चाहिए तो पढ़ने के लिए बाहर जाना होगा। पहाड़ के तमाम लोगों ने बाहर जाकर पढ़ा और मुकाम हासिल किया। इसके तमाम उदाहरण हमारे सामने हैं।

हृदयेश एमबीपीजी कॉलेज में पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की समस्याएं और संभावना को लेकर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंची थीं। सेमिनार में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति साहित देश भर के शिक्षाविद् भाग ले रहे हैं। एसीएसएसआर नई दिल्ली के सचिव डॉ. एएस सोन भी कार्यक्रम में शिरकत कर रहे हैं।

डॉ. हृदयेश ने पूर्व सीएम हेमवंती नंदन बहुगुणा की बातों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, जब लोग उनसे कॉलेज खोलने की मांग करते थे, तो वे स्पष्ट बोल देते थे, अगर मैं पढऩे इलाहाबाद नहीं जाता, तो आज मुख्यमंत्री बनकर आपके सामने खड़ा नहीं होता। यह बात उन्होंने उनके बेटे विजय बहुगुणा को भी याद दिलाई।

राज्य की उच्च शिक्षा मंत्री बोलीं, पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का उदाहरण भी हमारे सामने है। हमारे विश्वविद्यालय व कॉलेज दुनिया के किसी भी नंबर में नहीं है। रैंकिंग कहीं भी नहीं है। रैंकिंग में आगे बढ़ने के लिए प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा, हमारी सरकार ने उच्च शिक्षा में बहुत कुछ किया है। इसके बाद भी आप कुछ नहीं कर सकते हैं तो फिर हम क्या करें। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि युवाओं को फर्जी सपने दिखाने से कुछ नहीं होगा। स्किल डेवलपमेंट के लिए हकीकत में काम करना होगा।