उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून को सरकार शिक्षा के हब के रूप में विकसित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। अस्थायी राजधानी में सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्रों में दर्जनों नामचीन शैक्षिक संस्थान मौजूद हैं, जिसमें भारी संख्या में देश-विदेश के छात्र छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

साथ ही ऐसे संस्थान छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य के लिए बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं। देहरादून में जहां निजी क्षेत्रों में दर्जनों संस्थान उच्च दर्जे की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, वही देश-विदेश के छात्र-छात्राओं के लिए देहरादून हमेशा से आकर्षण का केन्द्र रहा है।

अस्थायी राजधानी देहरादून के एक निजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शिरकत की। उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ करीब 3 घंटे का वक्त भी गुजारा। साथ ही छात्र-छात्राओं से विभिन्न मुद्दों पर बात भी की। उनका कहना है कि उत्तराखंड उच्च दर्जे की शिक्षा के हब रूप में उभर रहा है। इस दिशा में निजी शैक्षिक संस्थानों की अहम भूमिका रही है।

हरीश रावत का कहना है कि उत्तराखंड कुदरती खुबसूरती वाला प्रदेश है। यहां की 65 फीसदी भूमि वनों से आच्छांदित है साथ ही राज्य की शांतवादियों का इलाका शिक्षा के लिए एक महफूज स्थान रही है। जहां राज्य की खूबसूरत वादियां युवाओं को आकर्षित कर रही है, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित हो रहे शैक्षिक संस्थान उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि राज्य के शिक्षा व्यवस्था के स्तर को और बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि इसके लिए जहां निजी संस्थानों को आगे आने की जरूरत है। वहीं युवाओं को हाई टेक्नोलॉजी के दौर में खुद को बेहतर साबित करने की चुनौती पेश आ रही है। मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान किया है। उनका कहना है कि युवाओं को बेहतर शिक्षा ग्रहण करने की जरूरत है, क्योंकि आने वाला भ‌विष्य उनके कंधों पर टिका है।

ऐसे में युवाओं को गंभीरता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है, जिससे देश और राज्य का विकास हो सके। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य के विकास में सभी लोगों को अपना सहयोग देना होगा।