उत्तरकाशी जिले में नौगांव ब्लॉक के कंसेरू गांव में ‘पलायन एक चिंतन’ विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें शामिल लोगों ने उत्तराखंड बनने के बाद पलायन में आई तेजी पर चिंता जताते हुए इसके लिए पिछले 15 सालों की राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया।

गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि तरक्की करने के लिए पहले भी गांवों से पलायन होता रहा है, लेकिन अलग उत्तराखंड बनने के बाद इसमें बहुत तेजी आई है। आज स्थिति यह है कि पहाड़ के गांव खाली होते जा रहे हैं। कहा कि बढ़ते पलायन के लिए गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क आदि मूलभूत सुविधाओं तथा आजीविका के साधनों का टोटा प्रमुख कारण है।

migration
दिव्या रावत ने कहा कि गांवों में रोजगार के साधन तैयार कर पलायन को रोका जा सकता है। खलाड़ी पुरोला के प्रगतिशील किसान युद्धवीर सिंह रावत ने भी बागवानी के अनुभव साझा किए।

village-migration1

गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनाव जीतते ही गांव छोड़ कर ब्लॉक मुख्यालय, जिला पंचायत सदस्य जिला मुख्यालय, विधायक अस्थायी राजधानी देहरादून और सांसद दिल्ली पलायन कर लेते हैं। जब चुने हुए जनप्रतिनिधि ही पलायन कर रहे हैं, तो गांवों की समस्याएं कौन हल करेगा।

migration1