वैसे तो सरकारें और प्रशासन उत्तराखंड में पर्यटन विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन पर्यटन के प्रति वे कितने संजीदा है इसका जीता-जागता उदहारण नैनीताल का बैंड स्टैंड हैं। सैलानियों के मनोरंजन के लिए कुछ साल पहले तक यहां पुलिस बैंड की धुनें गूंजा करती थीं, लेकिन समय के साथ बैंड तो तो खामोश हुआ ही और अब ये बैंड स्टैंड भी बदहाली का दंश झेल रहा है।

नैनीताल के बैंड स्टैंड पर कभी सैलानियों के मनोरंजन के लिए यहां बैंड की धुनें खूब गूंजा करती थीं, जो आज खामोश हो गई हैं। अब हालात ये हैं कि अंग्रेजों के जमाने का ये बैंड स्टैंड अपनी बदहाली की कहानी खुद ही चिल्ला-चिल्ला कर बता रहा है।

खस्ताहाल हुए इस बैंड स्टैंड में लाइट की व्यवस्था तो दूर अब बल्ब भी गिरने की कगार पर हैं। इतना ही नहीं इस बैड स्टैंड की रेलिंग भी टूटने लगी है। नैनीताल का ये बैंड स्टैंड काफी पुराना है। पहले इसका निर्माण लकड़ी से किया गया था, जिसके बाद 1955 में इसे स्थायी बना दिया गया था।
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इसके बाद से ही नैनीताल का चर्चित राम सिंह बैंड यहां सीजन के दौरान लगातार बाजा बजाया करता था, जिसकी यादें भी अब धूमिल होने लगी हैं। हालांकि अब पालिका अध्यक्ष इस बैंड स्टैंड को ठीक करने का दम भर रहे हैं।

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खैर खामोश हुए बैंड के बाद अब नैनीताल की ये धरोहर भी यादें बनने की कगार पर पहुंच गई हैं। बेहतर तो ये होगा कि पर्यटन महकमा और पालिका इस बैंड स्टैंड को बचाने की कोशिश करें, ताकि सैलानियों को मनोरंजन के साथ यहां पहाड़ी बैंड की धुनें एक बार फिर से सुनाई दें।