वीएचपी के अशोक सिंघल की यादें उत्तराखंड की पुरानी टिहरी से भी जुड़ी हैं। 90 के दशक में जब टिहरी बांध के विरोध में आंदोलन चरम पर था, तो उन्होंने टिहरी पहुंचकर बांध विरोधी आंदोलन को समर्थन दिया था। गंगोत्री-यमुनोत्री की यात्रा के दौरान वह कई बार चंबा में भी रुके।

वीएचपी के संरक्षक रहे अशोक सिंघल का मंगलवार को गुड़गांव में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। हिंदूवादी नेता रहे स्व. सिंघल का नाता पुरानी टिहरी से भी रहा है। अप्रैल 1998 में उन्होंने टिहरी पहुंचकर बांध विरोधी आंदोलन को समर्थन दिया था।

साथ ही उन्होंने आजाद मैदान में एक सभा को संबोधित कर बड़े बांधों का विरोध कर गंगा की अविरलता की पैरवी की थी। उन्होंने पुल के पास गंगा कुटीर पर पहुंचकर बांध का विरोध कर रहे पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा को भी समर्थन दिया। उस दौरान चंबा के लोग बांध के समर्थन में थे, जिससे वह बांध विरोधियों का विरोध कर रहे थे।

विरोध को देखते हुए अशोक सिंघल को खाड़ी से वाया देवप्रयाग होकर पुरानी टिहरी पहुंचना पड़ा। वीएचपी नेता राजेंद्र अग्रवाल और तिलकराम चमोली कहते हैं कि उन्होंने बांध विरोधी आंदोलन को नई ताकत दी थी। साल 2005-06 में गंगोत्री-यमुनोत्री की यात्रा के दौरान वह तत्कालीन वीएचपी महामंत्री प्रवीण तोगड़िया के साथ कई बार चंबा में कार्यकर्ताओं से मिलते रहे।

बांध विरोधी आंदोलन को समर्थन देने टिहरी पहुंचे सिंघल सभा करने के बाद पत्रकार वार्ता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि टिहरी बांध को बंद नहीं किया गया, तो वह 1000 संतों के साथ बांध स्थल कूच करेंगे।

यह कहने पर एक पत्रकार ने यह कह दिया था कि सिंघल जी आपके साथ एक भी संत नहीं दिख रहे हैं, आप हजार संतों की बात कर रहे हैं। तो वे प्रश्न कर रहे पत्रकार पर भड़क उठे। कार्यकर्ताओं ने किसी तरह मामला शांत कराया।

देशभर में राष्ट्रवादी विचारधारा की अलख जगाने वाले वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल का रुड़की और आसपास के गांवों से दशकों पुराना नाता रहा है। उनके निधन पर लोगों के जेहन में अब भी 1960 के दशक के उनके वे किस्से कौंध रहे हैं। जब अशोक सिंघल सहारनपुर से बस में रुड़की पहुंचते थे और फिर यहां से साइकिल पर गांव-गांव घूमकर राष्ट्रप्रेम का अलख जगाया करते थे।

वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की टीम में शहर के कई पुराने नामचीन और संघ के आधार स्तंभ माने वाले लोग शामिल थे। इनमें सबसे प्रमुख नाम है लाला अमरनाथ का। किसी जमाने में अशोक सिंघल हर माह सिविल लाइंस स्थित उनके घर पर आते थे, खाना खाते थे और अपनी योजना बताने के बाद उनके साथ साइकिल पर जनसंपर्क के लिए निकल पड़ते थे।

लाला अमर नाथ के बेटे विपिन कुमार बताते हैं उनके पिता का अशोक सिंघल के साथ गहरा लगाव था। वे बताते हैं कि 60 के दशक के आसपास जब सहारनपुर जिला था। तब अशोक सिंघल जिला प्रचारक थे और यहां पहुंचकर साइकिल पर प्रचार करते थे।

कई बार अपनी साइकिल बस पर रख लेते थे और फिर साइकिल उतारकर गांव की पगडंडियों पर चलकर लोगों तक पहुंचते थे। इसी तरह संघ प्रचारक रहे समाजसेवी सोमप्रकाश गुप्ता, बीजेपी नेता प्रमोद गोयल के पिता लाला रमेश चंद, ब्रज भूषण शर्मा व जयदेव आर्य सरीखे कई लोगों के घर उनका आना जाना लगा रहा था।

अशोक सिंघल ने 2004 में बीजेपी के जिला मंत्री गौरव गोयल और 2009 में लाला अमर नाथ के घर आकर गौ ग्राम यात्रा को लेकर संघ प्रेमियों के साथ मंथन किया था। उनके परिचितों में अशोक शर्मा आर्य, रमेश भटेजा, विवेक कांबोज आदि से भी उनका काफी लगाव था।

अशोक सिंघल हाल ही में सितंबर के आखिरी सप्ताह में अमेरिका में वीएचपी का प्रचार प्रसार करने के लिए यात्रा कर लौटे थे। रुड़की पुरानी तहसील निवासी गौरव गोयल बताते हैं कि उनके लौटने के बाद एक माह पूर्व अक्टूबर के पहले हफ्ते में उन्होंने दिल्ली जाकर अशोक जी से भेंट की।

इस दौरान उन्होंने अमेरिका में संगठन के कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। लेकिन उन्हें उस समय यह गुमान भी नहीं था कि यह उनके साथ आखिरी भेंट होगी।