पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी -फाइल फोटो

भूमि की घटती उपलब्धता के साथ बढ़ती आबादी का हवाला देते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश में खाद्यान्न और स्वच्छ जल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक संसाधन बचाने रक्षा के उपायों पर जोर दिया है।

तकरीबन 12 करोड़ हेक्टेयर भूमि के निम्नीकरण के विभिन्न चरणों में होने का हवाला देते हुए उन्होंने भूमि के अधिक टिकाऊ व्यवस्था के इस्तेमाल और भूमि प्रबंधन दस्तूर अपनाने पर बल दिया।

मुखर्जी ने कहा, ‘हमने तब खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से पार पाया। लेकिन अब क्या होगा, जब हमारा सामना कृषि के लिए घटती भूमि उपलब्धता के साथ बढ़ती आबादी से हो रहा है। जब मृदा के स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है और पानी की गुणवत्ता कृषि उत्पादकता को घटा रही है।’ उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा के अनेक आयाम हैं।

खाद्यान्न उत्पादन में पोषाहार का स्तर आबादी में खाद्यान्न की प्रचूरता का एक महत्वपूर्ण निर्धारक है। वैश्विक भूख सूचकांक 2015 में भारत 104 देशों में 80वें स्थान पर है। इस सूचकांक में तीन सूचक ‘अल्प पोषाहार, बच्चे का जरूरत से कम वजन का होना और शिशु मृत्यु दर’ शामिल है।

मुखर्जी ने कहा, ‘यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। हमें अपनी आबादी के पोषाहार की स्थिति में समयबद्ध तरीके से सुधार करना है।’