सांकेतिक तस्वीर

उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून स्थित नारी निकेतन के अंदर भीतरखाने कौन सा घिनौना खेल चल रहा है। इसका सच्चाई का खुलासा एक गुप्त पत्र से हुआ है। यहां मानसिक रूप से बीमार एक संवासिनी के शारीरिक शोषण की बात सामने आई है। एक दैनिक अखबार को भेजे एग गुप्त पत्र में आरोप लगाया गया है कि एक संवासिनी के गर्भवती होने के बाद नारी निकेतन के स्टाफ ने उसका गर्भपात करा दिया है।

यह पत्र समाज कल्याण निदेशक के नाम भेजा गया है। पत्र की कॉपी मीडिया को दी गई है। इस संबंध में समाज कल्याण के निदेशक वीएस धनिक का कहना है कि वह जांच के बाद ही कुछ कह पाएंगे।

केदारपुरम स्थित नारी निकेतन पिछले दो महीनों से संवासिनियों के साथ हो रहे व्यवहार और उनकी संख्या को लेकर चर्चाओं में है। नारी निकेतन के स्टाफ की आपसी लड़ाई भी किसी से छिपी नहीं है। एक संवासिनी के कथित तौर पर गायब होने के बाद एक अधीक्षिका को निलंबित किया गया था।

उस समय भी काफी हंगामा हुआ था। ऐसे में गुप्त पत्र ने एक बार फिर से नारी निकेतन के स्टाफ पर लगने वाले आरोपों को हवा दी है। गुप्त पत्र में आरोप लगाया गया है कि एक संवासिनी का पहले शारीरिक शोषण किया गया। जब वह तीन माह की गर्भवती थी तो उसका बिना अधिकारियों की अनुमति के गर्भपात करा दिया गया।

पत्र में लिखा गया है कि संवासिनी को 15 नवंबर की रात 9.30 बजे ऑटो बुक करा ले जाया गया। एक निजी अस्पताल में गर्भपात कराने के बाद 16 नवंबर की सुबह सात बजे उसे नारी निकेतन लाया गया। पत्र में लिखा गया है कि मामले की डॉक्टरों की टीम भेजकर मेडिकल जांच कराई जाए।

पत्र में सलाह दी गई है कि संवासिनियों का मेडिकल चेकअप कराएं तो नारी-निकेतन के स्टाफ की असलियत सामने आ जाएगी। मामले में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने की मांग की गई है।

समाज कल्याण विभाग के निदेशक वीएस धनिक का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई पत्र नहीं आया है। हो सकता है कि यह किसी की शरारत हो या फिर स्टाफ के आपसी झगड़ों की वजह से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हों। लेकिन आरोप गंभीर हैं। मामले की जांच कराई जाएगी। इसके बाद ही कुछ जवाब दे पाएंगे।