एक तरफ निर्माण पर रोक और वन अधिनियम के चलते बिनसर वन्य जीव विहार के आसपास के गांवों में बिजली की लाइन तक नहीं डाली जा सकी है दूसरी तरफ वन विभाग ने बिनसर वन्य जीव विहार के भीतर चीड़ के सैकड़ों हरे पेड़ गिराकर पानी इकट्ठा करने के लिए खाल (छोटा तालाब) का निर्माण शुरू कर दिया गया है।

निर्माण कार्य के लिए वहां बकायदा जेसीबी का इस्तेमाल किया जा रहा है। सैकड़ों पेड़ काटने पर क्षेत्र के ग्रामीणों में रोष है। उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। बता दें कि वन अधिनियम के तहत अभ्यारण्य के भीतर पेड़ काटना तो दूर किसी भी तरह का निर्माण करना संभव नहीं है।

इसी कारण आसपास के कई गांवों में आज तक बिजली की लाइन नहीं पहुंच पाई है। दूसरी तरफ वन विभाग ने बिनसर गेट से कुछ ही दूरी पर एक खाल (छोटा तालाब) बनाने के लिए चीड़ के सैकड़ों पेड़ गिरा दिए हैं। वहां बकायदा जेसीबी से कटान चल रहा है। भारी संख्या में पेड़ काटने की सूचना मिलने पर क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है।

ग्रामीणों का आरोप है कि अभ्यारण्य के अंदर इतनी संख्या में पेड़ गिराने की अनुमति केंद्र सरकार से ली जानी चाहिए थी। उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

ज्ञापन देने वालों में उत्तराखंड संसाधन पंचायत सुनोली के संयोजक ईश्वर जोशी, ग्राम प्रधान संगठन ताकुला के अध्यक्ष सुनील घाराकोटी, प्रधान राधा देवी आदि लोग हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल का कहना है कि फिलहाल ग्रामीणों का ज्ञापन उन्हें नहीं मिला है। ज्ञापन मिलने पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।