लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस का साथ छोड़ बीजेपी का दामन थामने वाले नेता सतपाल महाराज का जल्द ही पार्टी में कद बढ़ने वाला है। उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने पर चर्चाएं आम हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का विश्वास उनमें बढ़ा है तो संघ नेतृत्व भी महाराज की ताकत का देशभर में फायदा चाहता है। उनकी मानव उत्थान सेवा समिति से देशभर के लोग जुड़े हुए हैं। इसलिए संघ उनकी ताकत को अपने साथ जोड़ना चाहता है।

सूत्र बताते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष पद पर राज्य के वरिष्ठ नेताओं के बीच विवाद कम नहीं हुआ तो पार्टी आलाकमान महाराज पर दांव खेल सकती है। हालांकि आलाकमान के पास इस पद के लिए राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी का चेहरा भी है।

पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने भी बीजेपी आलाकमान को उत्तराखंड में पार्टी की सरकार बनाने की तमन्ना जाहिर करते हुए अध्यक्ष पद की अपरोक्ष दावेदारी ठोकी है। बलूनी और कोश्यारी के अलावा मदन कौशिक, धन सिंह रावत और प्रकाश पंत के नाम पहले से ही अध्यक्ष पद की दावेदारी में हैं। लेकिन महाराज ठाकुर बिरादरी से हैं और मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ पार्टी आलाकमान को उनमें दम दिख रहा है।

सबसे बड़ी बात ये है कि बीजेपी में शामिल होने के बाद किसी तरह कि जिम्मेदारी न मिलने के बावजूद सतपाल महाराज ने झारखंड और दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूरी निष्ठा से पार्टी के पक्ष में काम किया है। यदि वे प्रदेश अध्यक्ष के गणित में फेल रहे तो मोदी के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जिम्मेदारी दी जा सकती है।

हालांकि केंद्रीय मंत्रिमंडल के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी व रमेश पोखरियाल निशंक की दावेदारी भी कम नहीं आंकी जा रही है। कहा जा रहा है कि महाराज को बड़ी जिम्मेदारी के लिए बीजेपी आलाकमान से संकेत भी मिले हैं। शायद यही वजह है कि प्रदेश के नेताओं से उन्होंने मेलजोल बढ़ाना शुरू कर दिया है।

तीन दिन पहले ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल से मुलाकात की है। संघ से भी उनकी नजदीकी है, पिछले ही महीने संघ प्रमुख मोहन भागवत खुद उनके हरिद्वार स्थित आश्रम गए थे।