राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंगा की सहायक नदी रामगंगा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सोमवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों की खिंचाई की। एनजीटी ने उन्हें इस नदी में अपशिष्ट बहाने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराने को कहा।

एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकारों से उन कदमों के बारे में बताने को कहा जो उन्होंने इस नदी में खतरनाक पदार्थों को डालने से रोकने के लिए उठाए हैं।

पीठ ने कहा, ‘यदि आप (उत्तर प्रदेश) कुछ करना चाहते हैं तो हल जरूर है। आपको हल ढूढने की जरूरत है। आप नदी में जाने वाले नालों के मुंह पर शोधन संयत्र लगा सकते हैं ताकि अपशिष्ट उसमें न जाए।’

याचिकाकर्ता के वकील गौरव बंसल ने अधिकरण से कहा कि उत्तर प्रदूषण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हलफनामे में कहा गया है कि इस सहायक नदी में मैग्नेशियम और क्लोराइड सहित खतरनाक पदार्थों का स्तर मान्य स्तर से 50 गुणा ज्यादा है। नदी तट पर स्थित पीतल की फैक्ट्रियां नदी में ये पदार्थ बहाती हैं।

रामगंगा गंगा की सहायक नदी है जिसका उद्गम उत्तराखंड में है और वह उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर और हरदोई शहरों से गुजरती है।