मैगी से प्रतिबंध हटाना हाईकोर्ट की एक भूल, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा FSSAI

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकार (एफएसएसएआई) ने देश में मैगी नूडल्स से प्रतिबंध हटाने संबंधी बोम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकार ने हाई कोर्ट के 13 अगस्त के आदेश को ‘त्रुटिपूर्ण’ करार देते हुए सरकार से स्वीकृत प्रयोगशालाओं को फिर से परीक्षण के लिए दिए गए नमूनों की शुचिता पर सवाल उठाया है।

एफएसएसएआई ने दलील दी है कि हाई कोर्ट ने किसी तटस्थ प्राधिकार की बजाय स्विस कंपनी की भारतीय इकाई नेस्ले को ही नए नमूने उपलब्ध कराने के लिए कह कर ‘भूल’ की है।

इससे पहले, हाई कोर्ट ने देश में मैगी नूडस्ल की नौ किस्मों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकार और महाराष्ट्र के खाद्य नियंत्रक के आदेशों को निरस्त कर दिया था।

हाई कोर्ट ने कहा था कि प्रतिबंध लगाते समय नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया, क्योंकि मैगी का उत्पादन करने वाले पक्ष को सुना नहीं गया था।

एफएसएसएआई सूत्रों ने कहा कि याचिका में खाद्य नियामक के अधिकारियों के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को भी हटाने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि प्राधिकार को संबद्ध कानून के तहत प्रयोगशाला में नमूनों की जांच की अनुमति दी जाए और साथ ही केवल सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच पर जोर नहीं दिया जो कि संख्या में बहुत कम हैं।

हाई कोर्ट ने इससे पहले एफएसएसएआई और महाराष्ट्र खाद्य नियामक एफडीए के आदेश को निरस्त कर दिया था। इन्होंने देश में मैगी नूडल्स की नौ किस्मों पर रोक लगा दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि नूडल्स पर रोक लगाते समय नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया, क्योंकि विनिर्माता को उसका पक्ष सुनने का मौका नहीं दिया गया।