विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट इस साल शीतकाल के लिए मंगलवार यानी 17 नवम्बर को बंद हो जाएंगे। उत्तराखंड के चार धामों में अंतिम व सर्वश्रेष्ठ धाम कहे जाने वाले बद्रीधाम में पिछले तीन दिन से कपाट बंद होने की प्रारम्भिक पूजाएं शुरू हो चुकी थीं। मंदिर के मुख्य कपाट पंचाग मुहूर्त के मुताबिक शाम ठीक 4.35 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

कपाट बंद होने की परम्परा मुख्य कपाट बंद होने से चार दिन पहले ही शुरू हो जाती है। इसमें पहले दिन भगवान आदिगणेश जी के कपाट बंद होते हैं तो दूसरे दिन आदिकेदारेश्वर के कपाट बंद होते हैं और तीसरे दिन खांडू पुस्तक की पूजा व चौथे दिन महालक्ष्मी जी की पूजा होती है। इसके बाद अंतिम दिन जो कि विजयदशमी के दिन तय होता है उस पर्व पर भगवान बद्री‌विशाल के कपाट बंद होते हैं।

कपाट बंद होने से पहले मंदिर के मुख्य पुजारी रावल द्वारा स्त्री वेश धारण कर माता लक्ष्मी जी की मूर्ति को मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित किया जाता है मान्यता है कि शीतकाल में जब भगवान बद्रीविशाल के कपाट बंद होते है तो उस समय माता लक्ष्मी भगवान बद्रीविशाल की सेवा करती हैं और देवर्षि नारद जी के द्वारा यहां होने वाली पूजाएं संपादित की जाती हैं।

शामिल होंगे कई लोग
इस मौके का साक्षी बनने के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ ही देश और विदेश के श्रद्धालु भी धाम में पहुंचे हैं। सोमवार शाम को धाम में रावल ईश्वरन नंबूदरी ने माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना संपन्न की। मंगलवार को बद्रीनाथ के कपाट दिनभर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुले रहेंगे। कपाट बंद होने की तैयारियों को लेकर बद्रीनाथ मंदिर को करीब 20 कुंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया है।

कपाट बंद होने से पहले होती हैं ये धार्मिक प्रक्रियाएं
बद्रीनाथ के रावल मां लक्ष्मी की सखी के रूप में स्त्री वेश धारण कर माता लक्ष्मी जी की प्रतिमा को बद्रीनाथ गर्भगृह में ले जाते हैं। इससे पूर्व गर्भगृह से भगवान उद्धव, कुबेर व गरुड़ की उत्सव मूर्तियों को चांदी की डोली में रखा जाता है। इस दौरान धृत लेप कंबल को भगवान बद्रीविशाल और मां लक्ष्मी को ओढ़ाया जाएगा। इसी के साथ कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

कपाट बंद होने से पहले कब क्या होता है…
रात 2.30 बजे – श्री बद्रीनाथ जी का अभिषेक और फूलों से श्रृंगार।
तड़के 3.00 बजे – श्री बद्रीनाथ जी की पूजाएं शुरू।
सुबह 3.15 बजे – आम श्रद्धालुओं द्वारा श्री बदरीनाथ जी के दर्शन।
सुबह 11.00 बजे – धर्माधिकारी और वेदपाठियों द्वारा स्वस्ति वाचन।
दोपहर 3.00 बजे – रावल द्वारा स्त्री वेश धारण कर मां लक्ष्मी का गर्भगृह में प्रवेश।
शाम 4.15 बजे – बद्रीनाथ जी के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू।
शाम 4.35 बजे – बद्रीनाथ जी के कपाट शीतकाल के लिए बंद।