देश में असहिष्णुता की बात कहकर पुरस्कार लौटाने वाले सहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और कलाकारों को बॉलीवुड अभिनेत्री महिमा चौधरी ने करारा जवाब दिया है। अभिनेत्री महिमा चौधरी रविवार को हल्द्वानी में थी। यहां उन्होंने एक दैनिक हिन्दी अखबार से बातचीत में कहा कि यदि हमें कोई बात पसंद नहीं आती है या हमारी नजर में कुछ सही नहीं हो रहा है तो निश्चित तौर पर हमें उसका विरोध करना चाहिए। हर किसी का विरोध करने का तरीका भी अलग-अलग होता है।

महिमा चौधरी सहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और कलाकारों के देश में असहिष्णुता की बात कहकर पुरस्कार लौटाने को बिल्कुल सहीं नहीं मानती हैं। उनका कहना है कि विरोध के कई तरीके हो सकते हैं। हमें उन्हें अपनाना चाहिए। न कि पुरस्कार लौटाना चाहिए। पुरस्कार हमें हमारी योग्यता पर दिया जाता है।

अगर मैं अपनी बात करूं तो मेरी नजर में असहिष्णुता की बात कहकर पुरस्कार लौटाना सही फैसला नहीं है। मेरा मानना है कि यदि मैं किसी चीज का विरोध करती हूं, तो उसके कई तरीके हो सकते हैं। मैं भूख हड़ताल पर बैठ सकती हूं, मैं मुंह पर काली पट्टी बांध सकती हूं, बांह में काली पट्टी बांधकर भी इसका विरोध कर सकती हूं। पर पुरस्कार नहीं लौटाऊंगी।

यह पुरस्कार मुझे मेरी योग्यता पर मिला है न कि मैंने इसे किसी अन्य तरीके से हासिल किया है। हमारे देश में लोग एक-दूसरे को देखकर अधिकांश निर्णय लेते हैं। यदि एक ने पुरस्कार वापस किया तो देखा-देखी कई लोग इसके समर्थन में आ गए, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए।

हल्द्वानी में किया लेडीज परिधान के शोरूम का उद्घाटन
महिमा चौधरी ने रविवार को हल्द्वानी एक लेडीज परिधान के एक शोरूम का उदघाटन किया। कार्यक्रम के दौरान महिमा का वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश और जिला पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद ने जोरदार स्वागत किया।

शोरूम के उदघाटन के बाद महिमा चौधरी ने महिला परिधानों को भी देखा। इस दौरान महिमा चौधरी के साथ सेल्फी लेने वालों के बीच होड़ मची रहीं। लोगों को काबू में करने के लिए पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।

महिमा चौधरी ने उत्तराखंड की खूबसूरती के साथ-साथ यहां के लोगों की जमकर तारीफ की और साथ ही वो यहां के शैक्षणिक संस्थानों और ऐजुकेशनल हब से काफी प्रभावित दिखी।

अपने फैंस से बात करते हुए महिमा चौधरी ने कहा कि जनवरी में उनकी एक बंगाली फिल्म रिलीज हो रही है, जिसका नाम डार्क चॉकलेट है।