आज विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि मेडिकल साइंस रोज़ नई उपलब्धिया प्राप्त कर रहा है। परन्तु कहीं इसका उल्टा असर हमारे खुद के शरीर पर तो नहीं पड़ रहा। पिछले कुछ दशकों से देखें तो विज्ञान जितनी पहुंच बढ़ा रहा है मानव शरीर उतना ही कमजोर होता जा रहा है। जिस तरह से मधुमेह, ब्लड प्रेशर, सर्वाइकल, जोइंट पेन आदि जैसी बीमारिओं से लोग संघर्ष कर रहे हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले 10-15 साल बाद कैसे हालत हो सकते है।

भोग विलासिता के साधनों व ऐशो आराम भरे लाइफस्टाइल ने हमें भीतर से कमजोर बना दिया है। यदि शास्त्रों की बात करें तो इसका अनुमान पहले ही लगाया जा चुका है, क्योंकि जितनी भी बीमारियां हैं इन सब की गणना ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से की जा सकती है और अनुमान लगाया जा सकता है कि व्यक्ति को किस समय पर किस प्रकार की बीमारी हो सकती हैं। अपनी कुंडली द्वारा हम यह जान सकते हैं कि हमें किस समय यह रोग लग सकते है और समय से पहले ही उसकी रोकथाम करना हमारे लिए संभव है हालांकि पूर्ण रूप से तो कभी भी किसी होनी को बदला नहीं जा सकता, परन्तु उसे शुरुआत में रोका जरूर जा सकता है।

हमारी दिनचर्या कहीं स्वास्थ्य की दुश्मन तो नहीं
यदि शास्त्रों में इसकी गणना पहले से ही की जा चुकी है तो पिछले कुछ सालों में ही यह सारी बीमारियां इतने बड़े स्तर पर कैसे हो गईं। इसके पीछे हम कह सकते ही हमारी खुद की दिनचर्या इसका बेहद बड़ा कारण है। क्योंकि मशीनी युग में हम अपनी शारीरिक गतिविधियों को भूल सा गए हैं और हर एक कार्य के लिए कुछ ऐसा ढूंढते हैं जिससे शरीर को कष्ट न हो और अपना समय और मन दोनों ही व्यवसाय में लगा कर रखते हैं। ऐसा करने से हम वित्तीय रूप से व अन्य मंजिलो को तो प्राप्त कर लेते हैं, परन्तु स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर जाते है, जिसके फलस्वरूप हमें रक्तचाप, शुगर, जोड़ो में दर्द, पेट में खराबी या पाचन क्रिया ठीक न होना तथा कई प्रकार के रोग लग जाते हैं।

पूर्व में और वर्तमान में कितना फर्क
पहले के व्यक्ति व्यायाम किया करते थे। पैदल ज्यादा चला करते थे, जिसके चलते उन्हें मोटापे सम्बन्धी समस्या नहीं रहती थी। और अच्छा व घर पर बना खाना खाने से मधुमेह व अन्य बीमारियों की भी अपने आप रोकथाम हो जाती थी। इससे यह बात साफ़ होती है कि यदि हम चाहें तो आज भी अपनी सेहत का सुधार काफी हद तक कर सकते हैं और इसमें सबसे ज्यादा मददगार है ज्योतिषीय प्रामर्श लेना।

क्या कहती है हमारी कुंडली
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हमारी कुंडली में 12 घर होते हैं, जिन सभी के अलग-अलग कार्य हैं। किसी से हमारी विशेषताओं का, स्वाभाव का पता चलता है तो किसी से हमारे कार्य का, इसी प्रकार शादी-विवाह, संतान, विदेश यात्रा, रोग, शत्रु इत्यादि का पता चलता है।

जो ग्रह हमारे रोग वाले घर के स्वामी होते हैं वह अपनी दशा-महादशा में रोग देकर चलते हैं तथा शरीर के जिस भाग पर प्रभाव डालते हैं उसे रोग ग्रस्त बना देते हैं। ऐसे में ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पर काबू कैसे पाया जाए। वैसे तो यह किसी के भी हाथ में नहीं है। यदि कोई कहता है कि उसके पास ऐसा कोई उपाय है जिससे व्यक्ति को कोई हानि, रोग इत्यादि नहीं होगा तो वह केवल भ्रमित कर रहा है।

ज्योतिष विज्ञान के सहारे हम उस चीज़ का पहले से अनुमान लगाकर उसके लिए तैयार हो सकते हैं। उस ग्रह से सम्बंधित उपाय कर सकते हैं, जिससे कि अपनी दशा व गोचर के प्रभाव से वह ज्यादा बुरा प्रभाव न दिखाए। परन्तु उससे पूर्णतया नहीं बचा जा सकता।

ग्रह और बीमारी का सम्बन्ध

  • मधुमेह, लिवर, मोटापा इन सब रोगों का मुख्य कारण बृहस्पति से सम्बंधित है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति पाप प्रभाव में होगा, या वह किसी रोग वाले घर अथवा भाव से सम्बन्ध बनाएगा इस प्रकार के रोग देकर चलेगा।
  • गले या नाक सम्बन्धी रोग शुक्र के कारण होते हैं। वीर्य सम्बंधित रोगों का कारण भी शुक्र पर बुरा प्रभाव का होना है।
  • आज के समय में सबसे ज्यादा परेशान करने वाला रोग शारीरिक थकावट, जोड़ो का दर्द, घुटने सम्बन्धी समस्याएं सभी शनि के प्रभाव से होती हैं। अस्थमा रोग का कारक भी शनि ग्रह है।
  • रक्त व हड्डी से सम्बंधित रोग सूर्य के दुष्प्रभाव से व स्किन के रोग बुध के पाप प्रभाव में होने से घटित होते हैं।

इन सब रोगों की रोकथाम संभव है यदि समय पर सही उपाय करवा लिए जाएं।

यह उपाय दान से, स्नान से, पूजा से व कुछ चीज़ों के परहेज़ से किए जा सकते हैं। कुछ व्यक्ति हर वस्तुओं का दान करने लग जाते हैं। जैसे कुत्तों को रोटी खिलाना, सूर्य को जल देना, शनि मंदिर में तेल चढ़ाना, गरीबो में आटा व अन्य खाद्य सामग्री बाटना इत्यादि। अनेक प्रकार के दान पुण्य वह अपनी समझ से करने लग जाते हैं, जिसका उनको अनजाने में नुकसान उठाना पड़ता है। हमेशा जो ग्रह हमारे लिए अशुभ है उसी से समबन्धित चीज़ों का दान करना चाहिए।

अपने शुभ ग्रह से सम्बंधित चीज़ों का दान कभी नहीं करना चाहिए, बल्कि उससे सम्बंधित वस्तुओं को अपने साथ रखना चाहिए। हर व्यक्ति को अपने जन्मदिन से पहले वार्षिक उपाय जरूर करवाने चाहिए। इससे ग्रहों सी शांति होती है तथा मार्ग में रुकावटें कम आती हैं।

naresh_singal325यह लेख मशहूर ज्योतिष, वास्तु और फेंग्शुई विशेषज्ञ नरेश सिंगल से बातचीत के आधार पर लिखा गया है। वास्तु से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए नरेश सिंगल से संपर्क करें…

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