मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि कृषि, शिक्षा और पशुपालन विकास के तीन मंत्र हैं। इनके बिना किसी भी गांव, प्रदेश और देश का विकास संभव नहीं है। राज्य सरकार पहाड़ में कृषि, शिक्षा और पशुपालन पर ही खास फोकस कर रही है और कल्याणकारी योजनाओं के बलबूते वह अगले चार साल में पहाड़ से पलायन को रोकने में कामयाब होंगे। यही नहीं सात साल में स्थितियां ऐसी बन जाएंगी कि गांव छोड़कर गए लोग दोबारा गांव में बसने के लिए आने लगेंगे।

मुख्यमंत्री शनिवार को गौचर औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का उद्घाटन करने के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। बाल दिवस पर चाचा नेहरू को याद करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर देते उन्होंने कहा कि आज राज्य में 100 महाविद्यालय, 12 विश्वविद्यालय, आठ इंजीनियरिंग कॉलेज, आठ नर्सिंग कालेजों सहित ढाई लाख की आबादी पर पॉलीटेक्निक और 12 हजार की आबादी पर आईटीआई संचालित हो रहे हैं, इसके बावजूद राज्य में काबिल युवाओं की कमी हो रही है।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने गौचर मेले की नींव रखने वाले पत्रकार स्व. गोविंद प्रसाद नौटियाल की मूर्ति व पं. नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण किया और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भीम सिंह बिष्ट, बख्तावर सिंह को शॉल देकर सम्मानित किया। विधायक डॉ. एपी मैखुरी, नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश नेगी, स्वागत समिति के अध्यक्ष विजय प्रसाद डिमरी ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण, वन निगम के अध्यक्ष हरीश धामी, चाय विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष देवेंद्र झिक्वांण, डीएम विनोद कुमार सुमन, मेलाधिकारी विवेक प्रकाश, एसपी सुनील कुमार मीणा, गैरसैंण के एसडीएम केएस नेगी, एसओ पीसी भट्ट सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सड़कें गांवों के विकास के लिए बनाई जा रही हैं, लेकिन स्थानीय लोग इसके लाभ से वंचित हैं। गांवों के उत्पाद जैसे दूध, सब्जी, फल आज भी इन सड़कों से बाजारों में नहीं पहुंच रहे हैं, बल्कि मेरठ, सहारनपुर, ज्वालापुर का यूरिया मिला हुआ दूध और रसायन मिली हुई सब्जियां इन सड़कों से गांवों तक पहुंच रही हैं। इससे गांवों में कई तरह की बीमारियां हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई में पं. नेहरू और गोविंद नौटियाल पहाड़ के अन्य नेताओं के साथ जेल में बंद थे। तभी पं. नेहरू ने पहाड़ के नेताओं को गौचर और जौलजीवी मेले को शुरू करने के लिए प्रेरित किया था।

मेले में हुई ये घोषणाएं

  • सूगी में बारातघर।
  • देवलीबगड़ में खेल मैदान।
  • मैखोली स्कूल में दो अतिरिक्त कक्षा कक्ष।
  • कन्या जूनियर हाईस्कूल बौंला में दो अतिरिक्त कक्षा कक्ष।
  • गौचर नगर पालिका के लिए 50 लाख की मंजूरी।
  • साल 2016 में गौचर के लिए इंडोर स्टेडियम।
  • मांग पत्र के अध्ययन के बाद तीन सड़कों की स्वीकृति।