केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद, 17 को बंद होंगे बद्रीनाथ के कपाट

गढ़वाल अंचल के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध धाम केदारनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार को भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल में श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए बंद हो गए।

केदारनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रावल भीमशंकर लिंग शिवाचार्य स्वामीजी ने बताया, ‘मंदिर के कपाट शुक्रवार सुबह आठ बजे पारंपरिक पूजा अर्चना और विधि विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान भीषण ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मंदिर समिति के अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।’

उन्होंने बताया, ‘कपाट बंद होने के बाद भगवान शिव की मूर्ति को एक डोली में बैठाकर निकटवर्ती उखीमठ के ओंमकारेश्वर मंदिर की ओर रवाना कर दिया गया। भगवान शिव की डोली रामपुर और गुप्तकाशी होते हुए रविवार को ओमकारेश्वर मंदिर में पहुंचेगी, जहां शीतकाल के दौरान उनके दर्शन किए जा सकेंगे।’

रावल ने बताया, ‘इस साल के यात्रा सीजन में कुल 1.52 लाख श्रद्धालु केदारनाथ धाम के दर्शनों के लिए पहुंचे और यह संख्या पिछले साल के मुकाबले करीब 50 हजार ज्यादा है।’ उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि यात्रा रूट पर यात्रियों के लिए सुविधायें पहले से बेहतर हुई हैं और यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर भी उनमें विश्वास बढ़ रहा है।

केदारनाथ और उसके आसपास के क्षेत्रों में साल 2013 के मध्य में भीषण प्राकृतिक आपदा से भयंकर तबाही हुई थी। हालांकि, उसके बाद से केदारनाथ में युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है।

गढ़वाल हिमालय में समुद्रतल से 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ मंदिर और अन्य तीनों धामों, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट हर साल अक्टूबर-नवंबर में शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं जो अगले साल अप्रैल-मई में दोबारा खोले जाते हैं।

छह महीने के यात्रा सीजन के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक उत्तराखंड आते हैं और चारधाम यात्रा को गढ़वाल हिमालय की आर्थिक रीढ़ माना जाता है।

केदारनाथ और उसके आसपास के क्षेत्रों में साल 2013 के मध्य में भीषण प्राकृतिक आपदा से भयंकर तबाही हुई थी। हालांकि, उसके बाद से केदारनाथ में युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है। चार धामों में सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट इस साल 17 नवंबर को बंद होंगे।

हिमालय की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित ये चारों धाम शीतकाल में भीषण ठंड और भारी बर्फबारी की चपेट में रहते हैं और इसलिए इस दौरान उन्हें श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया जाता है। हर साल अक्टूबर-नवंबर में शीतकाल के लिए बंद होने वाले ये कपाट अगले साल अप्रैल-मई में दोबारा खोल दिए जाते हैं।