सरयू और रामगंगा नदी से लगे पिथौरागढ़ व बागेश्वर जिलों को गुफाओं की घाटी कहा जाता है। इस समय सबसे ज्यादा गुफाएं पिथौरागढ़ जिले में हैं। बागेश्वर के कांडा में गुफा मिले अभी दस महीने ही बीते थे और अब रावतसेरा गांव में शिवलिंग और पानी का कुंड समेटे एक और गुफा देखी गई है।

तीन दिन पहले रावतसेरा-सेराघाट सड़क निर्माण के दौरान मजदूरों को यह गुफा दिखी तो वैज्ञानिकों का दल वहां पहुंच गया। प्रारंभिक आकलन के बाद माना गया है कि यह गुफा 15 हजार साल पुरानी है। रावतसेरा गांव के राजू सहित अन्य लोगों ने साफसुथरी गुफा के मुहाने से पत्थर हटाया तब इसका पता चला।

गुफा का प्रवेश द्वार लगभग एक मीटर ऊंचा और एक मीटर चौड़ा है, जबकि लंबाई पंद्रह सेंटीमीटर मापी गई है। शिवलिंग 50 सेंटीमीटर लंबा है। रावतसेरा पहुंचे भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. बहादुर सिंह कोटलिया और जर्मनी से आई शोध छात्र बुजीना ने इसका बारीकी से निरीक्षण किया।

डॉ. कोटलिया कुमाऊं की अन्य गुफाओं पर भी शोध कर रहे हैं। गुफा के अंदर पंद्रह मीटर की गहराई पर वैज्ञानिकों ने पानी का कुंड भी खोजा है। डॉ. कोटलिया के मुताबिक यह गुफा लगभग पंद्रह हजार साल पुरानी है। प्रथम दृष्टया लगता है कि लगभग पंद्रह हजार साल पूर्व मानवों की उपस्थिति इस स्थान पर रही होगी।

संभवत: तब इस गुफा का प्रयोग तपस्या आदि के लिए किया गया होगा। कांडा में मिली गुफा को भी वैज्ञानिकों ने दस हजार साल पुरानी बताया था। अब रावतसेरा की गुफा पर शोध शुरू कर दिया गया है।