केदारनाथ धाम

भगवान शिव के 11वें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार को (भैयादूज) के पावन पर्व पर पूरे विधि-विधान के साथ शुभ लग्न पर शीतकाल के बंद कर दिए जाएंगे।

बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली धाम से रात्रि प्रवास को रामपुर पहुंचेगी। 15 नवंबर को चल विग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी। यहां ओंकारारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की शीतकाल के छह महीने पूजा होगी।

पंचाग गणना के तहत शुक्रवार को शुभ लग्न पर सुबह 7 बजे भगवान श्री केदारनाथ धाम के कपाट मंदिर के मुख्य पुजारी राजशेखर लिंग द्वारा विधि-विधान के साथ बंद किए जाएंगे। इससे पहले बाबा के स्वयंभू ज्योर्तिलिंग को समाधि रूप दिया जाएगा।

मंदिर के गर्भगृह में विशेष भस्म एवं समाधि पूजा के साथ लिंग को भस्म से ढक दिया जाएगा। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद कर ताले को सील किया जाएगा।

पूजा-अर्चना के साथ बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली मंदिर की परिक्रमा के बाद शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी।

मान्यताओं का हवाला देदे हुए केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग ने बताया कि कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद अपने पित्रों का कर्मकांड करने के बाद पांडवों को भैयादूज के दिन ही स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी।

इसलिए इस दिन से शीतकाल प्रारंभ माना जाता है और पंरपराओं के अनुरूप बाबा केदार के कपाट बंद किए जाते हैं।

डोली कार्यक्रम
13 नवंबर : सुबह 7 बजे शुभ लग्नानुसार कपाट बंद होंगे, इसी दिन डोली प्रस्थान कर रात्रि प्रवास को रामपुर पहुंचेगी।
14 नवंबर : पूजा-अर्चना के बाद रामपुर से गुप्तकाशी के लिए प्रस्थान कर रात्रि प्रवास विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी।
15 नवंबर : विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी से ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान। दोपहर बाद बाबा केदार ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होंगे।