उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वीकार किया है कि राज्य में रहने वाली 30-35 लाख जनता का जीवन अब भी खुशहाल नहीं है और कहा कि उन्हें विकास में भागीदार तथा साधन संपन्न बनाने के लिए अन्य 70 लाख लोगों को उन्हें साथ लेकर चलना होगा।

अस्थायी राजधानी देहरादून में 15वें राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में ‘उभरता उत्तराखंड, उन्नत उत्तराखंड’ पुस्तिका के विमोचन के बाद संबोधन में मुख्यमंत्री रावत ने कहा, ‘राज्य के सामने सड़क, संपर्क और खराब मौसम की चुनौतियों के बीच विकास से दूर लोगों को साथ लेकर चलना भी एक बड़ी और कठिन चुनौती है।’

उन्होंने कहा, ‘सड़क और संपर्क की चुनौती पार हो जाएगी। खराब मौसम से भी निपट लेंगे, लेकिन एक चुनौती ऐसी है जिससे निपटने के लिए कठिन परिश्रम करना होगा। राज्य में अब भी 30-35 लाख लोग ऐसे हैं जिनके जीवन में खुशहाली नहीं आ पाई है। हम उन्हें भी विकास में भागीदार और साधन-संपन्न बनाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि जो भाई विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं, उन्हें भी आगे ले आएं। उन्हें साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी विकास के पथ पर बढ़ रहे 70 लाख लोगों की भी है।’

रावत ने कहा कि जब पूरे राज्य की जनता खुशहाल हो जाएगी तब हमारा राज्य एक आदर्श राज्य बन जाएगा और इसके लिए हम पूरा प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने हालांकि भरोसा दिलाया कि रोजगार न होने तथा गरीबी के कारण पलायन का दंश झेल रहे क्षेत्रों में अगले चार सालों में क्षेत्र या आसपास के इलाकों में वह लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेंगे।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि अवसर विहीन समझे जाने वाले राज्य के कई क्षेत्रों को वह अगले सात-आठ साल में ‘संभावना युक्त’ क्षेत्रों में बदल देंगे जिससे न केवल स्थानीय युवाओं को वहीं रोजी-रोटी मिलेगी, बल्कि बाहर के लोग भी अपने अच्छे जीवन की संभावनाएं तलाशने के लिए पहाड़ों की ऊंचाइयों और गाड-गदेरों का रुख करेंगे।

हालांकि, राज्य के गठन से लेकर अब तक 15 सालों की यात्रा को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अच्छा बताया और और कहा कि इस समय उत्तराखंड अन्य प्रदेशों के बीच एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और प्रति व्यक्ति आय के मामले में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि साल 2013 में हुए प्राकृतिक विध्वंस के बावजूद लोगों की क्रियाशीलता बाधित नहीं हुई और उसके बाद की अवधि में प्रति व्यक्ति आय में दस हजार रुपये का इजाफा हुआ है।

प्राकृतिक आपदा के बाद केदारनाथ में हो रहे पुनर्निर्माण को मानवीय चमत्कार बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘शून्य से छह डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान में काम करने वाले लोगों ने वह कर दिखाया है, जिसपर मुख्यमंत्री होते हुए मैं विश्वास नहीं कर पा रहा हूं।’ इस साल की चार धाम यात्रा में आए 10 लाख तीर्थयात्रियों की संख्या को पुनर्निर्माण से पैदा हुए विश्वास का प्रतिफल बताते हुए रावत ने कहा कि उनकी सरकार इस यात्रा को 12 महीने निर्विघ्न रूप से चलाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा 10 लाख अन्य लोग राज्य के अन्य पर्यटन स्थानों तथा दूरस्थ अंचलों में भी आए और यह सब सुरक्षित उत्तराखंड का माहौल बनाने के लिए राज्यवासियों की सामूहिक मेहनत का नतीजा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों से कहा है कि अक्टूबर-2016 तक सिर्फ उत्तराखंड के विकास को ध्यान में रखते हुए कार्य करें।