उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की समृद्ध लोकसंस्कृति की हमेशा से पहचान रहे चैती गीत की गूंज अब लगभग लुप्त हो गई है। चैती गीतों के संरक्षण की कवायदें भी अब शुरू हो गई हैं।

श्रीनगर गढ़वाल में स्वर्गीय बचनदेई स्मृति फाउंडेशन व विद्याधर श्री कला संगठन सहित अन्य युवा संस्कृतिकर्मियों द्वारा समन्वित रूप से इसके प्रयास किए जा रहे हैं।

इस कड़ी में प्रसिद्ध चैती गायिका स्वर्गीय बचनदेई की पुण्यतिथि पर उनके गीतों का संकलन कर राज्य की पहली चैती आडियो सीडी का विमोचन किया गया। सीडी के जरिए चैती एवं राधाखंडी गीतों को एक नया अंदाज दिया गया है।

ऑडियो सीडी में लोक गायक संजय पांडे और लोकगायिका लता तिवारी ने अपनी आवाज में चैती गीतों को आकर्षक अंदाज में लोगों के सामने पेश किया है।

संस्कृतिकर्मी प्रो.डी.आर. पुरोहित का कहना है युवाओं को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराने का ये प्रयास है। उनका कहना है कि सबसे पहले चैती गीतों को संरक्षित करने और फिर बिना उनकी मौलिकता को बिगाड़े उसे श्रोताओं के सामने पेश किया जाना चाहिए।

लोकगायक संजय पांडे का कहना है कि चैती गीतों को गाने वाली स्वर्गीय बचनदेई से उन्होंने चैती गायन की थोड़ी बहुत विधा सीखी थी, लेकिन उनसे पूरी विधा सिखने से पहले ही उनका स्वर्गवास हो गया।

उनका कहना है कि जितना भी वे बचनदेई से सीख पाए उसे ही अपनी आवाज में श्रोताओं तक अपनी सीडी के माध्यम से पहुंचा रहे हैं। कार्यक्रम में चैती एवं राधाखंडी गीतों को स्कूली बच्चों द्वारा भी प्रस्तुत किया गया।