विख्यात कन्नड़ लेखक, शोधकर्ता एवं इतिहासकार एम. चिदानंद मूर्ति के नेतृत्व में कई नागरिक बेंगलुरु में इकट्ठा हुए और देश में ‘बढ़ती असहिष्णुता’ के लिए अपना सम्मान लौटाने वाले लेखकों और कलाकारों के खिलाफ जवाबी प्रदर्शन किया।

कथित असहिष्णुता के विरोध के जवाब में इकट्ठा होने वाले अन्य प्रमुख लोगों में जाने माने लेखक एवं समीक्षक सुमतींद्र नादिक, अभिनेता अविनाश शामिल थे।

मूर्ति ने कहा, ‘कुछ लोग यह आरोप लगाते हुए अपने पुरस्कार लौटा रहे हैं कि देश में असहिष्णुता है..यह मूखर्ता है। मैं भी एक साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता हूं, लेकिन मैं इसे नहीं लौटा रहा क्योंकि मुझे इस देश के लोगों में कोई असहिष्णुता नहीं दिखती।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे केंद्र सरकार में कोई असहिष्णुता नहीं दिखती और मुझे पुरस्कार केंद्र सरकार से नहीं मिला। मुझे अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया गया जो एक स्वायत्तशासी संगठन है।’

इस दौरान इकट्ठा लोगों ने कहा कि देश में ‘असहिष्णुता बढ़ने’ जैसी कोई चीज नहीं है जैसा कि पेश किया जा रहा है। भारत ‘विश्व का सबसे सहिष्णु देश है जहां विविधता के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व है।’