उत्तराखंड के गढ़वाल अंचल में चमोली जिले के नागनाथ पोखरी निवासी गोपाल दत्त मिश्र ने एक जबरदस्त कारनामा कर दिखाया है। उन्होंने श्रीमद्भगवद गीता को गढ़वाली भाषा में तैयार किया है।

लोकभाषा के विकास की दिशा में गोपाल दत्त मिश्र ने ये प्रयास करते हुए गीता के सभी श्लोकों का गढ़वाली में अनुवाद किया है।

अनुवाद में उन्होंने हर अध्याय और श्लोक का भाव गीता के उपदेशों के जैसा ही बनाए रखा है। इससे पहले धार्मिक महाकाव्यों में रामायण का ही गढ़वाली संस्करण उपलब्ध था।

गीता का गढ़वाली काव्य नाम की ये पुस्तक तैयार करने में उन्हें दो साल से ज्यादा का समय लगा।