गैरसैंण में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए एक हजार करोड़ रुपये की जरूरत बताते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को कहा कि इस संबंध में वित्तीय सहायता के लिये वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख रहे हैं।

अस्थायी राजधानी देहरादून में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा, ‘गैरसैंण में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए त्वरित रूप से 500 करोड़ रुपये तथा अगले दो सालों में होने वाले कार्यों के लिए अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये की जरूरत है, जिसके लिए केंद्र से विशेष वित्तीय सहायता की जरूरत होगी। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री को पत्र लिख रहा हूं।’

उन्होंने कहा कि गैरसैंण में तेजी से निर्माण कार्य जारी है और अब तक वहां 20 फीसदी अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां होने वाले कार्यों के लिए कुल 1000 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी जिसके लिए केंद्र से दो-तीन चरणों में धनराशि की मांग की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण को चारों ओर से सड़कों से जोड़ने के साथ ही पेयजल, बिजली आपूर्ति आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमांऊ के बीचोंबीच चमोली जिले में स्थित गैरसैंण राज्य आंदोलनकारियों के लिए एक भावनात्मक मुद्दा है, जो पहाडी प्रदेश की राजधानी पहाडों में ही बनाए जाने के पक्ष में हैं।

gairsainसर्दियों में गैरसैंण का एक दृश्य

गौरतलब है कि साल 2000 में राज्य निर्माण के समय देहरादून को राज्य की अंतरिम राजधानी घोषित किया गया था। हाल में गैरसैंण में संपन्न हुए विधानसभा सत्र में गैरसैंण मुद्दे पर राज्य की कांग्रेस सरकार से रुख स्पष्ट करने की मांग करने वाली बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने पूछा कि गैरसैंण में स्थायी राजधानी बनाने की बुद्धिमता की बात उसने साल 2000 में क्यों नहीं की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे भी बीजेपी गैरसैंण के मुद्दे पर गंभीर नहीं है, अगर होती तो विधानसभा में उस पर चर्चा के लिए नियम 310 के तहत प्रस्ताव क्यों लाती। उन्होंने कहा, ‘विधानसभा अध्यक्ष नियम-58 में चर्चा को तैयार थे लेकिन बीजेपी नियम-310 में ही चर्चा कराने के लिए अड़ी रही।’

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए रावत ने कहा कि मीडिया को भी इस बात की जांच करनी चाहिए कि बीजेपी कितना सत्य बोल रही है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि केन्द्र सरकार उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा देने के साथ ही केन्द्रीय योजनाओ में 90-10 के अनुपात में पैटर्न की सरकार की मांग मान लेगी।