राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने गुरुवार को सुनवाई में उत्तराखंड में गंगा के तट पर 200 मीटर तक इमारतों के निर्माण पर वस्तुत: रोक लगा दी, ताकि नदी में प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को डालने से रोका जा सके।

एनजीटी प्रमुख स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा, ‘हम निर्देश देते हैं कि कोई भी निगम, प्राधिकरण या पंचायत न्यायाधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना गंगा नदी के तट पर उच्चतम बाढ़ रेखा पर 200 मीटर तक कोई इमारत, मकान, होटल या कोई भी ढांचा नहीं बनवा सकेगा।’

न्यायाधिकरण ने यह निर्देश वकील एम.सी. मेहता द्वारा दाखिल याचिका पर दिया। याचिका में गंगा को साफ करने की बात कही गई है तथा बताया गया है कि पश्चिमी देशों में नदियों को प्रदूषण से संरक्षित रखने के लिए उसके तटों पर बफर क्षेत्र बनाए जाते हैं जहां किसी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती।

सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (एनजीआरबीए) नदियों के तट के पास जमीन खरीद सकता है जैसा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सड़कों के निर्माण के लिए करता है। उन्होंने दावा किया कि महज ग्रामीण पंचायतों से मंजूरी लेकर निर्माण किया जा रहा है। ऐसी पंचायतें कोई विशेषज्ञ संस्था नहीं होती।

मेहता ने कहा कि गंगा नदी के तट पर अनियिंत्रित निर्माण के कारण नदी में प्रदूषण फैलाने वाले तत्व डाले जा रहे हैं तथा पहाड़ भूस्खलन एवं भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील हो गए हैं।