सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उत्तराखंड में घर में जन्म लेने वाली बीपीएल परिवारों की कन्याओं को भी 18 लाख रुपये से ज्यादा का लाभ दिया गया। योजना में देरी से आवेदन पर भी भुगतान किया गया। साथ ही गौरादेवी कन्याधन योजना में भी दोहरा भुगतान होने का खुलासा हुआ है।

सीएजी की रिपोर्ट ने समाज कल्याण विभाग की नंदादेवी कन्याधन योजना और गौरादेवी कन्याधन योजना में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया है।

सीएजी की ताजा रिपोर्ट में खुलासा करते हुए कहा गया है कि नंदादेवी कन्याधन योजना में साल 2011 से 2014 के बीच टिहरी, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में उन 365 कन्याओं को लाभ देते हुए 18 लाख रुपये से ज्यादा का अनियमित भुगतान कर दिया गया, जिनका जन्म घर पर हुआ था।

जबकि योजना के हिसाब से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जन्म लेने वाली बीपीएल परिवारों की कन्याओं को ही 5 हजार रुपये की एफडी सरकार द्वारा दी जाती है। सीएजी की तरफ से उजागर की गई वित्तीय अनियमितता पर जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास ने सीएजी को जवाब देते हुए कहा है कि भुगतान नियमानुसार हुआ है, जिसको सीएजी ने अस्वीकार कर दिया है।

इसके अलावा अल्मोड़ा और उधमसिंह नगर में 105 कन्याओं को भी 5 लाख से ज्यादा भुगतान कर दिया गया, जिनके जन्म लेने की सूचना भी नियमानुसार देर से मिली थी। जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास ने इस अनियमितता पर कहा है कि धनराशि उपलब्ध होने और योजना में ज्यादा से ज्यादा को लाभ देने के उद्देश्य से कन्याओं को भुगतान किया गया है।

गौरादेवी कन्याधन योजना में भी अनियमितताएं उजागर हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गौरादेवी कन्याधन योजना में टिहरी, हरिद्वार और अल्मोड़ा में 11 बालिकाओं को योजना के तहत दो बार भुगतान करते हुए पौने तीन लाख रुपये अनियमित रूप से खर्च किए गए।

गौरादेवी कन्याधन योजना में बीपीएल परिवारों की कन्याओं को इंटरमीडिएट की पढ़ाए के बाद की पढ़ाई के लिए 25 हजार रुपये के राष्ट्रीय बचत पत्र के जरिये मदद दी जाती है।

इसके अलावा योजना के तहत धन उपलब्ध होने के बावजूद कन्याओं को लाभ ना देने के मामले भी रिपोर्ट में उजागर किए गए हैं। इन जिलों के समाज कल्याण अधिकारियों ने अनियमित भुगतान को स्वीकारते हुए शीघ्र वसूली करने की बात सीएजी से कही है।

सीएजी की रिपोर्ट में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में भी अनियमितताएं और सुविधाओं को लेकर अव्यवस्थाओं को उजागर किया है यानी समाज कल्याण की इन योजनाओं को लेकर विभागीय हीलाहवाली सीएजी की रिपोर्ट में उजागर हुई है।