उत्तराखंड के मुख्य सचिव राकेश शर्मा को तीन महीने के लिए पुनर्नियुक्ति देने के राज्य सरकार के फैसले को नामंजूर किए जाने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को कहा कि वह इस मसले पर केंद्र के साथ किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहते। लेकिन इस संबंध में अध्ययन करने के बाद अपनी शंकाओं के बारे में वह केंद्र को लिखेंगे।

अस्थायी राजधानी देहरादून में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इस संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री रावत ने कहा, ‘इस संबंध (मुख्य सचिव की पुनर्नियुक्ति) में हमें आइएएस काडर के नियंत्रक विभाग डीओपीटी से एक पत्र मिला है। हम देखते हैं कि उसमें क्या लिखा है। हम पहले अध्ययन करेंगे और फिर अपनी शंकाओं के बारे में केंद्र को लिखेंगे।’

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार केंद्र के साथ किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहती और आइएएस काडर के मामले में अपना निर्णय देना केंद्र का हक है, लेकिन हमें भी अपनी शंकाओं के निराकरण का हक है।

इस संबंध में रावत ने कहा कि गत 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले शर्मा के मुख्य सचिव पद पर सेवा विस्तार के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से अनुमति मांगी थी, लेकिन आखिरी समय तक भी वहां से कोई जवाब न आने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें तीन महीने के लिए पद पर पुनर्नियुक्त कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘आखिरी क्षण तक केंद्र का जवाब न आने से हमारे सामने भी मजबूरी थी। दो नवंबर से हमारा विधानसभा सत्र शुरू होना था, जिसमें अनुपूरक बजट सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित होने थे। ऐसे में हमने अपने अधिकारियों को बुलाया और सभी विकल्पों पर विचार करते हुए शर्मा को मुख्य सचिव पद पर पुनर्नियुक्त कर दिया।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे भी केंद्र से कोई जवाब न आने को यह मान लिया जाता है कि वह राज्य सरकार के प्रस्ताव से सहमत है। मुख्यमंत्री ने हालांकि साफ किया कि राज्य सरकार का फोकस इस समय विकास पर है और झगड़ा नहीं। इसलिए वह केंद्र से इस मसले पर टकराव नहीं चाहते। वह यह भी नहीं चाहते कि राज्य के लिए अपनी उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले एक अधिकारी को राज्य और केंद्र के बीच के टकराव में कष्ट सहना पड़े।