मुख्यमंत्री हरीश रावत (फाइल फोटो)

मंगलवार को समाप्त हुए उत्तराखंड विधानसभा के गैरसैंण सत्र के दौरान स्टिंग सीडी प्रकरण और स्थायी राजधानी गैरसैंण के मसले पर रुख स्पष्ट करने को लेकर चर्चा पर अड़े बीजेपी विधायकों के कथित उग्र रवैये को निंदनीय बताते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को कहा कि अपने इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से विपक्षी पार्टी की खुद ही कलई खुल गई है।

देहरादून में संवाददाताओं से रावत ने कहा, ‘मंगलवार को सदन में बीजेपी विधायकों के व्यवहार से गहरी वेदना हुई। जिस तरह से पीठ पर हमला किया गया, उस पर कागज की मिसाइलें उछाली गयीं, किताबें फेंकी गईं और माइक उखाड़ने की कोशिशें की गईं, उसके लिए विपक्ष जिम्मेदार है और उसका यह रवैया निदंनीय है।’

गौरतलब है कि चमोली जिले के गैरसैंण में मंगलवार को अचानक अनिश्चितकाल के लिए समाप्त हो गए सत्र के दौरान मुद्दों पर तत्काल चर्चा कराने की मांग को लेकर मुख्य विपक्षी बीजेपी ने जोरदार हंगामा किया था। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई थी और स्थिति को संभालने के लिए मार्शलों को अंदर बुलाना पड़ा था।

मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि सदन में सरकार की तरफ से उत्तराखंड का विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा बहाल किए जाने, केंद्र पोषित योजनाओं में फंडिंग पैटर्न फिर से 90:10 के अनुपात में किए जाने, राज्य को पर्यावरणीय सेवाओं के ऐवज में ग्रीन बोनस दिए जाने तथा हिमालयी राज्यों के विकास के लिए एक नीति बनाए जाने के लिए लाए गए संकल्प के दौरान भी बीजेपी ने अपना अडियल रवैया नहीं छोड़ा और उसे समर्थन नहीं दिया।

हालांकि, रावत ने कहा कि गैरसैंण में हुआ सत्र काफी अच्छा रहा, जिसमें सरकार ने अनुपूरक बजट के अलावा आंदोलनकारियों की आकांक्षाओं के अनुरूप सरकारी नौकरियों में उन्हें आरक्षण दिए जाने सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित करवा लिए।

इस संबंध में उन्होंने कहा कि 4788 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित होने से राज्य का वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए कुल बजट 37481 करोड़ रु हो गया है, जिससे राज्य की विकास योजनाओं को पिछले साल की अपेक्षा 15-16 फीसदी ज्यादा धन मिल सकेगा।

सरकार से गैरसैंण पर रुख स्पष्ट करने की मांग कर रही बीजेपी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण राजनीतिक नहीं बल्कि एक भावनात्मक मुद्दा है और सरकार इस पर सर्वानुमति बनाते हुए उस दिशा में आगे बढ़ रही है जबकि बीजेपी इसे उलझाना चाहती है।

उन्होंने कहा, ‘गैरसैंण इस राज्य की एक भावना है। पहले यहां ढांचागत सुविधाएं तो विकसित कर लें, फिर लोगों से पूछेंगे कि उनकी (स्थायी राजधानी के बारे में) क्या राय है।’ रावत ने कहा कि गैरसैंण में अगले दो-तीन महीने में विधायक हॉस्टल बनकर तैयार हो जाएगा और अगले साल जुलाई-अगस्त तक विधानभवन भी बन जाएगा। उन्होंने बताया कि गैरसैंण में इस समय 800 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य चल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियम 310 के तहत गैरसैंण पर चर्चा कराने की मांग कर बीजेपी ने खुद अपनी कलई खोल दी कि वह इस मसले पर गंभीर नहीं है और सिर्फ राजनीति करना चाहती है। उन्होंने कहा कि नियम 310 में केवल तात्कालिक महत्व के मसलों पर चर्चा होती है और अन्य महत्वपूर्ण मसलों पर नियम 58 में चर्चा हो सकती है लेकिन बीजेपी केवल नियमों के फेर में पड़ी रही और अध्यक्ष की नियम 58 के तहत चर्चा करने की बात अनसुनी कर दी।