आईएएस अधिकारी राकेश शर्मा को सेवानिवृत्ति के बाद मुख्य सचिव पद पर पुनर्नियुक्ति देने के उत्तराखंड सरकार के फैसले को केंद्र द्वारा अमान्य घोषित किए जाने और उनकी जगह तत्काल किसी अन्य अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश देने से राज्य में एक नया विवाद पैदा हो गया है।

केंद्र के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मुख्य सचिव का पद एक काडर पद है और उस पर योग्य अधिकारियों के होते हुए एक नान-काडर अधिकारी की पुनर्नियुक्ति नहीं की जा सकती। हालांकि, इस बाबत पूछे जाने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वह इस मसले पर केंद्र के साथ किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहते, लेकिन इस संबंध में अध्ययन करने के बाद अपनी शंकाओं के बारे में वह केंद्र को लिखेंगे और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

राज्य सरकार को भेजे गए डीओपीटी के निदेशक दिवाकर नाथ मिश्रा द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में शर्मा की पुनर्नियुक्ति को आइएएस (काडर) 154 के नियम नौ का उल्लंघन बताते हुए कहा गया है कि राज्यों के मुख्य सचिव के कार्यकाल को बढ़ाने का अधिकार भी केंद्र सरकार में ही निहित है।

पत्र में मिश्रा ने कहा है, ‘मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि मुख्य सचिव के रूप में राकेश शर्मा की पुनर्नियुक्ति का उत्तराखंड सरकार का आदेश अखिल भारतीय सेवा कानून, 1951 के प्रावधानों के अनुकूल नहीं है और फलस्वरूप उनकी नियुक्ति अमान्य है।’ पत्र में आगे कहा गया है, ‘इसलिए, राज्य सरकार को मुख्य सचिव पद पर तुरंत एक काडर अधिकारी की नियुक्ति करनी चाहिए।’

इस बीच, रावत ने देहरादून में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘राज्य सरकार को आइएएस काडर के नियंत्रक विभाग डीओपीटी से एक पत्र मिला है। हम पहले उसका अध्ययन करेंगे और फिर कोई निर्णय लेंगे।’ उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार केंद्र के साथ किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहती और आइएएस काडर के मामले में अपना निर्णय देना केंद्र का हक है लेकिन हमें भी अपनी शंकाओं के निराकरण का हक है।

इस संबंध में रावत ने कहा कि गत 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले शर्मा के मुख्य सचिव पद पर सेवा विस्तार के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से अनुमति मांगी थी, लेकिन आखिरी समय तक भी वहां से कोई जवाब न आने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें तीन महीने के लिए पद पर पुनर्नियुक्त कर दी।

उन्होंने कहा, ‘आखिरी क्षण तक केंद्र का जवाब न आने से हमारे सामने भी मजबूरी थी। दो नवंबर से हमारा विधानसभा सत्र शुरू होना था जिसमें अनुपूरक बजट सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित होने थे। ऐसे में हमने अपने अधिकारियों को बुलाया और सभी विकल्पों पर विचार करते हुए शर्मा को मुख्य सचिव पद पर पुनर्नियुक्त कर दी।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे भी केंद्र से कोई जवाब न आने को यह मान लिया जाता है कि वह राज्य सरकार के प्रस्ताव से सहमत है।

रावत ने हालांकि साफ किया कि राज्य सरकार का फोकस इस समय विकास पर है और झगड़ा नहीं और इसलिए वह केंद्र से इस मसले पर टकराव नहीं चाहते। वह यह भी नहीं चाहते कि राज्य के लिए अपनी उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले एक अधिकारी को राज्य और केंद्र के बीच के टकराव में कष्ट सहना पड़े।