किशोरावस्था विकास की वह अवस्था है जब व्यक्तित्व का विकास हो रहा होता है। इस समय अपनाई गई आदतें व्यक्ति के भविष्य का निर्धारण करती हैं। इस अवस्था में अपने भविष्य को लेकर भी उनमें कई शंकाएं रहती हैं।

पढ़ाई जैसे मेडिकल या नॉन मेडिकल, कॉमर्स, कला या मानवतावाद, खेल-कूद, कपड़ों का चुनाव, कहां घूमने जाएं व कई ऐसे कार्य जिनमें वह पहले अपने माता-पिता की सलाह लिया करते थे, अब उम्र में बदलाव के कारण और मानसिकता में परिवर्तन आने की वजह से वह कुछ निर्णय स्वयं भी लेने लगते हैं।

इसके साथ-साथ वह घर में होने वाले कार्यां में भी अपनी पसंद ना पसंद जाहिर करते हैं कि फर्नीचर इस तरह का लेना है या लाईट ऐसी लगवानी है व घर की दीवारों पर कलर स्कीम ऐसी रहेगी। ऐसा होना स्वभाविक भी है। उम्र के अनुसार बढ़ते व बदलते शौक में कुछ बुराई नहीं है लेकिन उनका कमरा ऐसा होना चाहिए जो कि उन्हें सोचने समझने की क्षमता प्रदान करे, उनके चरित्र का निर्माण करे और उनका नैतिक विकास करें।

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यह वह समय है जब बालक अपने आप को जीवन के लिए तैयार कर रहा होता है अतः उसके रहने का स्थान ऐसा हो जो उसे उत्साहित करे तथा जहां रहकर वह अपनी योग्यताओं का सही उपयोग कर सके।

फेंग्शुई में कई ऐसे उपाय होते है जिनसे आपके घर का इंटीरियर भी आधुनिक रहेगा व जिस तरह की पसंद आजकल के किशोर या टीनेजर्स करते है वह भी उनके अनुकूल रहेगा।

अध्ययन कक्ष में करें ये बदलाव

  • यदि घर में स्टडी रूम अलग से नहीं है तो लिविंग रूम के पूर्व में टेबल रखकर उसका प्रावधान किया जा सकता है और उस पर लैंप भी लगवा सकते हैं।
  • पढ़ाई में निरंतरता बनी रहे इसके लिए आप हरे रंग के फेंग्शुई लैंप का प्रयोग कर सकते हैं। यह आपको पूर्व की दीवार पर लगाना है यह न केवल आपको पढ़ाई में बल्कि किसी प्रतियोगिता की तैयारी में भी मदद करेगा।
  • पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा होती है, इसलिए पूर्व दिशा को एनर्जाईट करने के लिए हरे रंग का प्रयोग बेहद अच्छा रहता है। इस दिशा के शुभ प्रभाव से आप ज्ञानवान लोगों के संपर्क में आते रहेंगे जो कि अच्छे भविष्य के लिए पहली सीढ़ी साबित होगी।
  • यदि वह विदेश जाने के इच्छुक हैं तो वायव्य कोण यानि उत्तर-पश्चिम में क्रिस्टल ग्लोब लगाऐं और उसे दिन में तीन बार घुमाऐं।
  • लड़कों के लिए शयनकक्ष का चयन दक्षिण दिशा में किया जा सकता है, परंतु उनके कक्ष की उत्तर-पूर्व की दीवार पर माता-पिता की तस्वीर जरूर होनी चाहिए।
  • लड़कियों का शयनकक्ष दक्षिण से लेकर पश्चिम वाले ज़ोन तक नहीं होना चाहिए।
  • बेड की व्यवस्था दक्षिण से लेकर पश्चिम तक की जा सकती है।

तस्वीरें जो इंटीरियर व फेंग्शुई दोनों का ख्याल रखें

  • महात्मा बुद्ध, विवेकानंद की तस्वीर या उनके रोल मॉडल की तस्वीर भी इस दिशा में लगाई जा सकती है।
  • इस उम्र में जरूरत होती है तेज तर्रार दिमाग व स्वस्थ शरीर की, जिससे पढ़ाई के समय पढाई व मनोरंजन के समय खेलों का भरपूर आनंद उठाया जा सके। इसके लिए दक्षिण में 2 लाल घोड़ों की तस्वीर लगााई जा सकती है यह देखने में भी सुंदर प्रतीत होती है तथा लाभदायक भी रहती है।

दिशा के अनुसार प्रकाश का रंग कई मायनो में लाभ देता है

  • यदि फैंसी लाईट का चयन करना है तो इसे दिशा के अनुसार करे उत्तर में नीले रंग की लाईट आपको बेहद अच्छे अवसर प्रदान करेगी।
  • पूर्व में हरे रंग व नीले रंग की लाईट प्रयोग की जा सकती है।
  • यदि आप अपनी दक्षता में निपुणता लाना चाहते है तो नैऋत्य कोण यानि दक्षिण-पश्चिम में पीले रंग की लाईट का उपयोग किया जा सकता है।

यह लेख मशहूर ज्योतिष, वास्तु और फेंग्शुई विशेषज्ञ नरेश सिंगल से बातचीत के आधार पर लिखा गया है। वास्तु से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए नरेश सिंगल से संपर्क करें…

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