राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सोमवार को उत्तराखंड सरकार और राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण (एनजीआरबीए) को स्वच्छ गंगा परियोजना के लिए योजनाओं के वित्तपोषण के बारे में ब्योरा देने का निर्देश दिया।

एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हम उत्तराखंड सरकार को और राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण को इस सवाल का जवाब देने का निर्देश देते हैं कि गंगा की सफाई की परियोजना के लिए वित्तपोषण की आपकी क्या योजना है।’ अधिकरण ने चरण-1 के पहले हिस्से (गौमुख से हरिद्वार तक) पर अपना फैसला सुरक्षित रखा और कहा कि वह गंगा की सफाई के मुद्दे पर मंगलवार को जरूरी दिशानिर्देश जारी करेगा।

संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ ने उत्तराखंड के अधिकारियों को गंगा के किनारे स्थित राज्य के कई शहरों में सीवेज व्यवस्था के संबंध में अप्रामाणिक आंकड़े देने के लिए फटकार लगाई।

पीठ ने कहा, ‘कंप्यूटर से आंकड़े प्राप्त करना बहुत आसान है। क्या आपमें से कोई अधिकारी दावा कर सकता है कि इन डेटा को किसी व्यक्ति या एजेंसी ने भौतिक रूप से सत्यापित किया है। जमीनी स्तर पर आंकड़ों के वास्तविक सत्यापन के बिना योजनाएं तैयार की जा रहीं हैं।’

इस बीच एनजीटी ने चरण 1 के दूसरे हिस्से (हरिद्वार से कानपुर तक) में ‘गंभीर रूप से प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों से’ गंगा नदी में प्रवाहित दूषित पदार्थों के नमूने एकत्रित करने के लिए एक समिति भी बनाई।

अधिकरण ने कहा कि समिति को गंगा नदी के मार्ग में बाद में आने वाले स्थानों पर पानी की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए और आईआईटी-कानपुर, आईआईटी-दिल्ली तथा सीपीसीबी द्वारा नमूनों का विश्लेषण कराके दो सप्ताह में विश्लेषण रिपोर्ट दाखिल की जानी चाहिए।

एनजीटी ने गत 29 अक्टूबर को स्वच्छ गंगा परियोजना पर चल रहे काम पर चिंता जताते हुए कहा था कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे सर्वाधिक महत्व वाली राष्ट्रीय परियोजना कह चुके हैं तो कोई भी कमी क्यों रहनी चाहिए।