जाने-माने संत और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय गृहराज्यमंत्री रहे स्वामी चिन्मयानन्द एक बार फिर विवादों में हैं। उन पर एक बार फिर से अपहरण और बंधक बनाकर रखने का आरोप लगा है। आरोप किसी और ने नहीं बल्कि पूर्व में साध्वी रह चुकी और अब गृहस्त जीवन जी रही साध्वी चिदर्पिता ने लगाया है।

यही नहीं अपनी पत्नी को खोजते हुए उसे लेने आए चिदर्पिता के पति के साथ भी स्वामी चिन्मयानन्द ने कैमरे के सामने ही मारपीट करने की कोशिश भी की। उन्होंने महिला से अपने कुछ लोगों के साथ मिलकर बदसलूकी भी की।

चिदर्पिता के पति बीपी गौतम का आरोप है कि उनकी पत्नी और दुधमुंहे बच्चे का अपहरण करके पिछले एक महीने से
अस्थायी राजधानी देहरादून के रायवाला क्षेत्र में बने वैष्णवी अपार्टमेंट में रखा गया है।

मौके पर चिदर्पिता के पति अपनी पत्नी को लेने पहुंचे तो सामने से कुछ लोगों के साथ देश के संतों में नाम रखने वाले और बीजेपी नेता स्वामी चिन्मयानन्द आते दिखाई दिए।

संत बिना कुछ बोले ही पीड़ित पति पर हाथापाई को उतारू हो गए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में गृहराज्य मंत्री का पदभार संभाल चुके चिन्मयानन्द पर पहली बार इस तरह के आरोप नहीं लगे हैं। इससे पहले भी महाराज के ऊपर 2011 में बलात्कार जैसे संगीन आरोप लगे हैं, जिसमें गिरफ़्तारी के वारेंट तक जारी हुए, हलाकि बाद में महाराज ने उस पर स्टे ले लिया।

महाराज का कहना है कि वो निर्दोष हैं और आज भी वो चिदर्पिता की सहायता करने के लिए आए थे। आगे भी उसे जरूरत पड़ी तो वे उसकी सहायता करेंगे। स्वामी चिन्मयानंद का कहना है कि चिदर्पिता उसके साथ चल रहे मुक़दमे में समझौता करना चाहती थी, जिसके बाद उसने उनसे रहने की व्यवस्था करने को कहा था। इसके लिए अब वो उन्हें अपने पति के साथ मिलकर ब्लैक मेल कर रही है। वो एक फ्लेट खरीदकर देने का दबाव बना रही है।

बदायूं से अपनी पत्नी को ले जाने पहुंचे चिदर्पिता के पति बीपी गौतम की मानें तो उनकी पत्नी और बच्चे को महाराज ने रामपुर अपहरण कर जबरन यहा रखा हुआ था। यहां पर उसकी रखवाली के लिए भी चार लोग रखे थे। पीड़ित पति का कहना है कि मामले की शिकायत वो पहले भी यूपी और उत्तराखंड में कर चुके हैं और आज भी महाराज उनकी पत्नी को जाने नहीं दे रहा है और कुछ लोगों के साथ आकर मारपीट तक की है।

सबसे हैरानी की बात ये है कि जिस अपार्टमेंट में चिदर्पिता को पिछले डेढ़ महीने से रखा हुआ था। उस अपार्टमेंट को महाराज के कहने पर दिलवाने वाले शख्स का कहना है कि उनको नहीं मालूम था कि महाराज जी ने ऐसा करने के लिए ये अपार्टमेंट लिया था।

चूंकी मामला केंद्र सरकार की सत्ता संभाल रही बीजेपी के एक बड़े संत छवि के नेता से जुड़ा है, तो पुलिस भी अभी कुछ भी कहने से बच रही है। हैरानी की बात तो ये है कि पीड़ित पति के स्थानीय पुलिस चौकी में बीवी-बच्चे को छुड़वाने की गुहार लगाने के बावजूद पुलिस ने मौके पर जाने की जरूरत तक नहीं समझी।

एसएसपी देहरादून के मामला संज्ञान में लाने के बाद रायवाला पुलिस मौके पर तब पहुंची जब चिन्मयानंद अपनी दादागिरी पूरी तरह से दिखा चुके थे। जानकारी के अनुसार इसी संत स्वामी चिन्मयानंद को मोदी सरकार बहुत जल्द गवर्नर की उपाधि से नवाज सकती है।