उत्तराखंड विधानसभा में 42 विधायक ऐसे भी हैं जिन्होंने 1975 के एक्ट में दिए प्रावधानों के अनुसार संपत्ति का ब्योरा स्पीकर कार्यालय में जमा नहीं कराया है। कानूनन निर्वाचित या मंत्री नियुक्त होने के तीन महीने के अंदर संपत्तियों का विवरण देना जरूरी होता है। यह खुलासा काशीपुर निवासी वकील नदीमउद्दीन को सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी में हुआ।

उत्तर प्रदेश मंत्री व विधायक (आस्तियों व दायित्वों का प्रकाशन) अधिनियम 1975 की धारा 3 के अनुसार विधायक व मंत्री को निर्वाचित या नामित होने की तिथि से तीन महीने के भीतर अपनी व अपने परिवार के सदस्यों की सम्पत्तियों का विवरण विधानसभा सचिवालय को देना होता है।

20 फरवरी 2015 के प्रकाशित गजट में जिन मंत्रियों ने सम्पत्ति व दायित्व विवरण नहीं दिया है उनमें हरक सिंह रावत, प्रीतम सिंह, दिनेश अग्रवाल, सुरेंद्र सिंह नेगी, इन्दिरा हृदयेश, दिनेश धनै व यशपाल आर्य शामिल हैं। सम्पत्ति का ब्योरा छुपाने में सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष के विधायक भी पीछे नहीं हैं।

विधायकों में माल चन्द्र, विजयपाल सजवाण, राजेंद्र भंडारी, सुबोध उनियाल, विक्रम सिंह, अमृता रावत, महावीर सिंह रांगड, नवप्रभात, प्रेमचन्द्र अग्रवाल, मदन कौशिक, आदेश चौहान, चन्द्र शेखर, हरिदास, फुरकान अहमद, प्रदीप बत्रा, प्रणव सिंह चैम्पियन, सरबत करीम अंसारी, यतीश्वरानंद, सुन्दर लाल मन्द्रवाल, गणेश गोदियाल, तीरथ सिंह रावत, दलीप सिंह रावत, मयूख सिंह, नारायण राम आर्य, ललित फर्स्वाण, चंदन राम दास, मदन सिंह बिष्ट, मनोज तिवारी, हेमेश खर्कवाल, सरिता आर्या, शैलेन्द्र मोहन सिंघल, अरविंद पांडे, राजकुमार ठुकराल, राजेश शुक्ला, प्रेम सिंह, पुष्कर सिंह धामी, राजकुमार, हरबंस कपूर, रेखा आर्या व हीरा सिंह बिष्ट शामिल हैं।