पिछले कुछ समय से गौमांस को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। गौमांस खाने खाने या इसे प्रतिबंधित करने को लेकर तमाम लोग अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। अब श्री गोवर्धनपीठ पुरी के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती भी इस बहस में कूद गए हैं।

शंकराचार्य का कहना है कि भावुकता से गौमांस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। देश की राजनीति पर ‌चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि भारत में सत्तालोलुप्ता और अदूरदर्शिता बढ़ रही है। जिस कारण देश की राजनीति दिशाहीन हो गई है।

गुरुवार को निष्काम सेवा ट्रस्ट भूपतवाला में आयोजित पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि कंप्यूटर के युग में सनातन को भी विकृत किया जा रहा है। केंद्रीय व राज्य का शासनतंत्र इसके लिए जिम्मेदार है। वह विकास के पक्षधर हैं, लेकिन इसको स्वस्थ ढंग से परिभाषित और क्रियान्वित किया जाना चाहिए।

सनातन, गौवंश, गंगा और पर्यावरण दूषित न हो, महंगाई न हो विकास ऐसा परिभाषित हो। गौमांस पर प्रतिबंध के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोरी भावुकता व संकीर्णता से इसे नहीं रोका जा सकता। हिंदुओं की उपेक्षा भी नहीं की जा सकती है, इसलिए सद्भाव पूर्वक काम करना होगा।