नई दिल्ली।… गंगा नदी की सफाई के लिए कदम उठाने और उपाय सुझाने में नाकाम रहने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की खिंचाई की।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीसीबी) से कहा, ‘आपका काम प्रदूषण नियंत्रण करना है, लेकिन आपने कोई कार्रवाई नहीं की। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड होने के नाते आप सुझाव दें कि राज्य सरकार के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। आप राज्य सरकार के अधीन नहीं हैं और आपको राज्य सरकार से कहना चाहिए कि इस मुद्दे पर क्या करना है।’

पीठ ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, उत्तराखंड पेयजल निगम के सीईओ और उत्तराखंड जल संस्थान के सीईओ को भी कल हाजिर होने का आदेश दिया, ताकि वे गंगा में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए अपनी संस्थाओं द्वारा उठाए गए कदमों पर स्पष्टीकरण दें।

एनजीटी ने ये निर्देश तब दिए जब उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वकील हरिद्वार में लगाए गए सीवेज शोधन संयंत्रों और उनकी परिचालन क्षमता के बारे में जानकारी नहीं दे सके।

पीठ ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भी तब खिंचाई की जब उसके वकील इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए कि क्या उसने गंगा नदी की सफाई के मुद्दे पर कोई विचार किया है। पीठ इस मुद्दे पर गुरुवार को भी सुनवाई करेगी।