उत्तराखंड के जन कवि गिरीश तिवारी यानी ‘गिर्दा’ की पत्नी ने कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड लेने से मना कर दिया है। लेकिन यह उस तरह का मामला नहीं है, जिस तरह से आजकल देशभर में सम्मान लौटाने का खेल चल रहा है।

आयोजकों के जन सरोकारों से न जुड़े होने के चलते जन कवि ‘गिर्दा’ की पत्नी श्रीमती हीरा देवी ने आयोजकों द्वारा गिर्दा को दिया गया कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड लेने से साफ इनकार कर दिया।

उल्लेखनीय है कि ‘गिर्दा’ को दिया गया यह पुरस्कार मंगलवार को आयोजकों में से ही किसी एक ने ग्रहण किया था। ‘गिर्दा’ स्मृति मंच के संयोजक महेश जोशी का कहना है कि जनकवि और रंगकर्मी स्व. गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की पत्नी को पुरस्कार के लिए नैनीताल आमंत्रित किया गया था।

वह हल्द्वानी से नैनीताल तो आईं, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर नहीं गईं और न ही उन्होंने राज्यपाल द्वारा ‘गिर्दा’ को दिया गया मरणोपरांत कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार ग्रहण किया। जोशी ने बताया कि गिर्दा की पत्नी ने पुरस्कार लेने से पूर्व जनसंस्कृति और ‘गिर्दा’ से जुड़े रहे लोगों से विचार विमर्श किया कि क्या उन्हें यह पुरस्कार लेना चाहिए या नहीं।

इस पर ‘गिर्दा’ से और जन संस्कृति से जुड़े लोगों ने एकमत होकर ‘गिर्दा’ की पत्नी को यह पुरस्कार नहीं लेने का अनुरोध किया। इस पर स्वर्गीय ‘गिर्दा’ की पत्नी ने पुरस्कार लेने से मना कर दिया।

जब उनसे पूछा गया कि ‘गिर्दा’ के नाम का पुरस्कार किसी ने मंच में ग्रहण कर लिया है तो उन्होंने कहा कि जिसने पुरस्कार ग्रहण किया है वह इसे अपने घर ले जाए, मेरे पास यह पुरस्कार किसी भी हाल में नहीं आना चाहिए। क्योंकि मैंने पुरस्कार लेने से मना कर दिया है।

ज्ञात हो कि मंगलवार को राज्यपाल ने जनकवि रहे स्व. गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ को मरणोपरांत कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया, जिसे गिर्दा की पत्नी की अनुपस्थिति में आयोजकों में से ही किसी एक ने ग्रहण किया था।