उत्तराखंड में कुमाऊं मंडल के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल की बदहाली से खिन्न होकर पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी बुधवार को धरने पर बैठ गए। मंगलवार को ही उन्होंने अस्पताल पहुंचकर अव्यवस्‍थाओं के खिलाफ धरना देने की चेतावनी दी थी।

हल्‍द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल के बाहर पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी मुंह पर पट्टी बांधकर मौन व्रत पर बैठ गए। दोपहर करीब ढाई बजे एनडी तिवारी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे। अस्पताल की खराब ब्यवस्थाओं से नाराज होकर उनकी पत्नी उज्वला और बेटा रोहित शेखर भी उनके साथ धरने पर बैठे हैं। वित्तमंत्री डॉ. इंद्रा हृदयेश और श्रम मंत्री दुर्गापाल पूर्व मुख्यमंत्री को मानाने पहुंचे, लेकिन वह नहीं माने।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी मंगलवार शाम पांच बजे सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे थे। उनके बेटे रोहित शेखर तिवारी ने एसटीएच के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत और एमएस डॉ. एके पांडेय से स्टाफ की जानकारी ली थी।

अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों की कमी पर पूर्व मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई थी। अस्पताल में डॉक्टरों के साथ लगभग दो सौ नर्सें भी कम हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण एमबीबीएस के छात्रों की पढ़ाई में भी दिक्कत हो रही है। एनडी तिवारी ने कार्डिक फिजीशियन, कार्डिक सर्जन, एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफी जैसी सुविधाएं न होने पर आश्चर्य जताया था।

स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में आंकोलाजी फिजीशियन और आंकोलाजी सर्जन न होने पर भी वह हैरान रह गए। एसटीएच में एमआरआई मशीन 2005 में लगी थी जो खस्ताहाल हो चुकी है। ऐसा ही आलम सीटी स्कैन मशीन का है। तिवारी ने कहा कि एमआरआई और सीटी स्कैन की दो मशीनें होनी चाहिए। उन्होंने एसटीएच की अव्यवस्थाओं को लेकर चिकित्सा-शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत से बात की थी।