नई दिल्ली।… चीन-भारत सीमा पर अपनी मौजूदगी सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) इस संवेदनशील सीमा पर 50 नई चौकियां स्थापित करेगी। हालांकि उसने इस सीमा पर घुसपैठ की कई घटनाएं होने के मद्देनजर ‘युद्ध जैसे हालात’ होने से इनकार किया।

आईटीबीपी महानिदेशक कृष्णा चौधरी ने बल के 54वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक वार्षिक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि वह इससे इनकार नहीं करते कि आईटीबीपी-सेना और चीन की पीएलए के बीच सीमा को लेकर अलग-अलग धारणा के चलते घुसपैठ की घटनाएं हुई हैं, लेकिन इस सीमा पर अपने बल की तैनाती का उनका एजेंडा इस सीमा की रक्षा करना है, युद्ध करना नहीं।

उन्होंने कहा, ‘हमें युद्धोत्तेजक नहीं बनना चाहिए। उद्देश्य शांति है। उद्देश्य कोई युद्ध लड़ना नहीं बल्कि (इस सीमा की) रक्षा करना है। हमारे सभी पड़ोसी हमारे मित्र हैं और हम उनसे मित्रता बढ़ाना चाहते हैं। यह धारणा सही नहीं है कि (हाल में दोनों पक्षों के बीच आमना सामना होने के चलते’ हम युद्ध करेंगे। बड़ी चिंता की कोई बात नहीं है।’ उन्होंने कहा कि वे ‘उकसावे वाले बयान’ नहीं देना नहीं चाहते और भारत अपने सभी पड़ोसियों से मैत्रीय संबंध चाहता है।

चौधरी ने पिछले साल सीमा पार से होने वाली घुसपैठ की संख्या को साझा करने से इनकार किया। उन्होंने इसका खुलासा किया कि आईटीबीपी अधिक सीमा चौकियां स्थापित करके तथा बर्फबारी और तूफान के खतरे वाले इन क्षेत्रों में मौसम से बचाव वाले स्मार्ट सुविधाओं का निर्माण करके अपनी ताकत बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा, ‘हमने हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में इस साल छह नई सीमा चौकियां स्थापित की हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में आठ चौकियों में हमने सुविधाओं का उन्नयन किया है और सैनिकों की संख्या बढ़ाई है।’ उन्होंने कहा कि आईटीबीपी को अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में 52 नई सीमा चौकियां स्थापित करने की रक्षा मंजूरी मिल गई है और बल इनके निर्माण के लिए अंतिम सरकारी मंजूरी मिलने की ‘कगार पर’ है।

बल इन नई चौकियों के लिए आठ बटालियनें (करीब आठ हजार कर्मी) तैनात करेगा। उन्होंने कहा, ‘हमने सरकार से अनुरोध किया है कि वह हमारी 10 नई बटालियनें मंजूर करें ताकि हमारे पास आराम और आरोग्यलाभ के लिए अधिक यूनिट हो क्योंकि सीमा पर हमारे जवान बहुत मुश्किल परिस्थितियों में तैनात रहते हैं।’