गंगा क्लोजर के पहले ही दिन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने करीब सौ साल पुराना समझौता तोड़ दिया। इससे शनिवार को हरिद्वार की मशहूर हरकी पैड़ी में गंगाजल की एक बूंद भी नहीं पहुंची। हरकी पैड़ी पर विश्वविख्यात गंगा आरती भी बिना गंगा जल के ही करनी पड़ी। गंगा सभा ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग में अपना ऐतराज दर्ज करा दिया है।

गौरतलब है कि करीब 100 साल पहले तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और हरिद्वार में पुरोहितों की संस्था गंगा सभा के बीच महामना मदन मोहन मालवीय की उपस्थिति में एक लिखित समझौता हुआ था।

इस समझौते के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने गंगा सभा को आश्वस्त किया था कि हरकी पैड़ी पर हर सूरत में दो फुट जल बना रहेगा। आज 100 साल बाद भी गंगा क्लोजर की तिथि तब तक घोषित नहीं की जा सकती जब तक गंगा सभा से लिखित एनओसी नहीं मिल जाती।

इस बार सिंचाई विभाग ने सभा को लिखित रूप में दिया था कि प्रत्येक क्षण दो फुट से अधिक गंगा जल हरकी पैड़ी पर हर हाल में बना रहेगा। लेकिन हरकी पैड़ी पर शनिवार सुबह 11 बजे से एक बूंद भी जल नहीं है। दोपहर के समय गंगा को भोग लगाने की रस्म भी बिना जल अदा की गई।

सायंकाल आरती के समय सिंचाई विभाग से बार-बार कहा गया कि जल छोड़ा जाए। गंगा सभा के स्वागत मंत्री श्रीकांत वशिष्ठ ने बताया कि कई बार आग्रह के बावजूद जल नहीं छोड़ा गया और बिना जल के मां गंगा की आरती उतारी गई।

इसके विरोध में गंगा सभा की ओर से मौखिक आपत्ति के बाद अब उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से लिखित आपत्ति भी की जा रही है। गंगा सभा और पुरोहितों के शनिवार शाम को कहा कि अगर रविवार सुबह तक पानी नहीं छोड़ा गया तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

देखें बिन पानी कैसा होता है हरकी पैड़ी का हाल…