चंपावत जिले में जिला मुख्यालय के पास ही बालेश्वर मंदिर के करीब चंद राजाओं के समय बना बालेश्वर नौला आज पुरातत्व विभाग की लापरवाही के चलते अब बदहाली में है।

लापरवाही का आलम यह कि इस ऐतिहासिक जलकुण्ड के पीछे बने घरों का गन्दा पानी अब नौले के पीछे की दीवार से रिसकर सीधे नौले के अंदर आने लगा है। वहीं यह बालेश्वर नौला कभी चंद राजाओं कि पूजा का अहम हिस्सा भी रहा है। जिस का इस्तेमाल राजा पूजा-अर्चना के लिए करते थे। क्षेत्र की जनता की प्यास भी बुझाने का काम भी इसी नौले से पूरा होता था।

देश में ऐतिहासिक स्थलों का हाल कितना बुरा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चंपावत शहर में भी सरकारें इन धरोहरों को संभाल नहीं पा रही हैं।

दुनियाभर के देश जहां अपनी विरासत को सहेजने में जुटे हैं वहीं भारत में पुरातात्विक महत्व की चीजें बिखरी पड़ी हैं लेकिन कोई देखने-सुनने और उनकी रखवाली करने वाला नहीं है।