प्रस्तावित राजधानी गैरसैंण में 2 नवंबर से आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किए जाने वाले पांच हजार करोड़ के अनुपूरक बजट को बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल गई है। यही नहीं पूर्व सैनिकों के लिए दोहरी पेंशन योजना को भी मंत्रिमंडल ने स्वीकार कर लिया।

मंत्रिमंडल ने राजस्व ग्रामों के मानक तय करने के साथ ही जल विद्युत परियोजनाओं पर वाटर टैक्स की दरें तय कर दी हैं। राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों सहित राज्य निर्वाचन आयोग के ढांचे को भी मंजूरी दे दी गई है। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर भी कैबिनेट ने मुहर लगा दी है।

बुधवार को दोपहर बाद करीब तीन बजे से शुरू हुई कैबिनेट की बैठक देर रात तक जारी रही। विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के कारण बैठक के बाद होने वाली प्रेस ब्रीफिंग नहीं की गई। सत्र से ठीक पहले हुई बैठक में मंत्रिमंडल ने हर वर्ग का ध्यान रखने की कोशिश की।

मुख्यमंत्री की 31 मार्च, 2015 तक की सारी घोषणाओं के लिए अनुदान मदों को मंजूरी दे दी गई। वाटर टैक्स की दरें तय होने से उत्तराखंड सरकार को करीब 768 करोड़ रुपये का राजस्व हर साल मिलने की उम्मीद है। राजस्व ग्राम के लिए मानक तय कर कैबिनेट ने राजस्व ग्रामों को लेकर होने वाले आए दिन के विवाद को शांत करने की कोशिश की।

राजस्व ग्राम के मानक राज्य में अभी तक तय नहीं थे। इसके चलते राजस्व ग्राम घोषित करने के लिए सरकार को लगातार प्रस्ताव मिलते थे और इसमें राजनीतिक खेमेबंदी तक हो जाती थी। राज्य में इस समय करीब 16 हजार राजस्व ग्राम हैं। राजस्व ग्रामों के मानक पंचायत विभाग की सहमति से किए गए हैं।

युवाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खोलने की भी कोशिश की गई है। राज्य सरकार की ओर से संचालित नवोदय विद्यालयों में करीब 400 नौकरियों के दरवाजे सरकार ने खोल दिए हैं। पूर्व सैनिकों को दोहरी पेंशन को मंजूरी मिलने से पूर्व सैनिक राहत महसूस करेंगे।

इसी तरह गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का जिम्मा भी सरकार ने अपने ऊपर लिया है। राज्य निर्वाचन आयोग का पुनर्गठन कर सरकार ने लंबित सुधारों को अंजाम दिया। महिला डेयरी विकास योजना के तहत संविदाकर्मियों का मानदेय बढ़ाकर कैबिनेट ने राज्य में दुग्ध व्यवसाय को बढ़ाने की कोशिश की है। महिला स्वयं सहायता समूहों को दूध पर बोनस पहले ही सरकार घोषित कर चुकी है।

14वें वित्त आयोग की संस्तुतियों में ग्राम पंचायतों के लिए आबादी के अनुसार वित्त पोषण की व्यवस्था की गई है। ऐसे में पर्वतीय जिलों की पंचायतों को नुकसान होने का अनुमान है। इसी को देखते हुए मंत्रिमंडल ने पंचायतों के इस नुकसान की भरपाई का फैसला किया। कैबिनेट ने कुल 39 मामलों पर फैसला किया।