उमा भारती और हरीश रावत (फाइल फोटो)

उत्तराखंड में हरीश रावत की कांग्रेस सरकार को घेरने की बीजेपी की रणनीति राजनीति में बिखराव दिख रहा है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने केदारनाथ के पुनर्निर्माण के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत की पीठ थपथपाई है, लेकिन उसी की सीबीआई जांच के लिए उत्तराखंड से पार्टी सांसदों ने केंद्रीय गृहमंत्री का दरवाजा खटखटाया है। इसे बीजेपी में बिखराव न कहा जाए तो और क्या कहें।

मुख्यमंत्री हरीश रावत पर हमलावर हुई प्रदेश बीजेपी भी उमा की तारीफ के बाद बैकफुट पर आ गई है। उमा भारती के इस बयान को लेकर प्रदेश बीजेपी नेताओं ने बुधवार को केंद्रीय नेतृत्व को फैक्स भेजकर इस असहजता के बारे में जानकारी भी दी है।

2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के तरकश में कांग्रेस के खिलाफ जो तीर हैं उनमें आपदा राहत व केदारनाथ पुनर्निर्माण में हुआ घोटाला प्रमुख अस्त्र के तौर पर रखा है। इसी मुद्दे पर बीजेपी 2013 के बाद से लगातार आंदोलन कर रही है। इस मामले को लेकर बीजेपी ने कई बार विधानसभा की कार्यवाही नहीं चलने दी।

बीजेपी प्रदेश संगठन व विधानमंडल के एजेंडे में यह मुद्दा सबसे ऊपर है। कई बार कांग्रेस को इस मामले में पीछे भी हटना पड़ा, लेकिन अब बीजेपी की साध्वी व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने केदारनाथ पुनर्निर्माण के मामले में राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत की वाहवाही कर दी तो पूरी बीजेपी में असहजता की स्थिति पैदा हो गई।

क्योंकि बीजेपी सीएम को कटघरे में खड़ा कर रही है और उमा भारती ने सीएम को न सिर्फ बरी किया बल्कि उनके कार्यों की तारीफ भी कर दी। इत्तेफ़ाक यह है कि बुधवार को बीजेपी के प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष व सांसदगण केंद्रीय गृहमंत्री से जिन दो मामलों की सीबीआई जांच को लेकर मिले उनमें से एक आपदा घोटाला भी है।

और, मंगलवार को उमा भारती ने सरकार की पीठ थपथपा दी। इधर, राज्य के नेता खुलकर तो नहीं बोले, लेकिन असहज जरूर दिखे। क्योंकि केदारनाथ में हुए कार्यों को लेकर आरटीआई के तहत बीजेपी के वरिष्ठ नेता जानकारी जुटाकर सरकार पर हमला कर रहे थे।

सूत्रों की मानें तो अखबरों में छपी खबरों के फैक्स कई नेताओं ने दिल्ली भेजकर नाराजगी जाहिर की है। क्योंकि यदि बीजेपी नेता ही हरीश रावत के कार्यों की तारीफ करेंगे तो फिर विधानसभा चुनाव में सरकार को किस मुंह से कोसेंगे।