नई दिल्ली।… केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि उत्तराखंड में अलकनंदा और भागीरथी नदी के बेसिन में बनने वाली 24 पनविद्युत परियोजनाओं के पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभाव की ‘व्यापक’ रिपोर्ट इस महीने के आखिर तक पेश कर देगी।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी. पंत की पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पी. एस. नरसिम्हा ने सूचित किया है कि केन्द्र सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की बैठक 16 जून, नौ से 12 जुलाई, 17 औेर 18 अगस्त तथा नौ और दस सितंबर, 2015 को हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि विशेषज्ञ समिति 12 और 13 अक्टूबर, 2015 को इस मामले पर चर्चा कर रही है और वह 31 अक्टूबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने तथा उसे दाखिल करने की स्थिति में होगी।’

कोर्ट ने हाल ही में इस मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों से कहा कि विशेषज्ञ समिति के गठन सहित रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर अपनी आपत्तियां दाखिल करें क्योंकि शुरू से ही नुक्ताचीनी की जा रही है कि एक और विशेषज्ञ समिति गठित नहीं की जा सकती थी। कोर्ट ने कहा कि आपत्तियां 15 नवंबर तक दाखिल की जाएं।

विशेषज्ञ समिति एनटीपीसी, एनएचपीसी, टीएचडीसी, जीएमआर हाइड्रो पावर जनरल प्रा. लि और सुपर हाइड्रो प्रा. लि. जैसी कंपनियों की 24 परियोजनाओं का आकलन कर रही है।

इससे पहले, कोर्ट ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को उत्तराखंड में स्थापित होने वाली 24 पनबिजली परियोजनाओं में से 18 के बारे में पर्यावरण और पारिस्थितिकी प्रभाव की ‘विस्तृत’ रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय दी थी।

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि राज्य में 24 पनबिजली परियोजनाओं में से छह ने काफी हद तक कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया है। मंत्रालय ने शेष 18 परियोजनाओं के बारे में पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय देने का अनुरोध किया था।

शीर्ष अदालत ने 13 अगस्त, 2013 को अपने फैसले में उस साल उत्तराखंड में आयी प्राकृतिक आपदा पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य में अगले आदेश तक कोई नई पनबिजली परियोजना स्थापित करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।