इसे बदकिस्‍मती ही कहा जाएगा कि ‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी उत्तराखंड और संभवत: देश का भी पहला ऐसा शहर होगा, जहां खिलाडि़यों के लिए कोई खेल मैदान ही नहीं है।

शहर के कई खिलाड़ी कोचिंग के लिए देहरादून और दिल्ली की और रुख कर रहे हैं। शहर के भिलाड़ू में खेल मैदान बनाने की घोषणा कई बार हो चुकी है, लेकिन घोषणा पर अमल आज तक नहीं हो पाया है।

भिलाड़ू मैदान को नगर पालिका ने खेल विभाग को देने का प्रस्ताव भी किया है। भिलाड़ू मैदान पर खेल मैदान बनाने की घोषणा कई बार राज्य सरकारें कर चुकी हैं, लेकिन खेल मैदान की दिशा में एक इंच भी फाइल आगे नहीं बढ़ पाई।

दिलचस्‍प बात यह भी है कि एक तरफ मसूरी में एक भी खेल का मैदान नहीं है और सरकार भी इस खूबसूरत शहर को खेल का मैदान देने में असमर्थ रही है। इसके बावजूद दूसरी तरफ मसूरी ने कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी देश को दिए हैं।

पूर्व अंतरराष्ट्रीय रोलर हॉकी के रेफरी रहे दिवंगत नंदकिशोर बंबू ने देश-दुनिया में मसूरी का नाम हॉकी में रोशन किया। कुछ समय पहले ही मसूरी के राकेश रावत ने विश्व पुलिस गेम में मसूरी का नाम रोशन किया था।

हालांकि, किसी भी सरकार ने मसूरी के लिए खेल मैदान बनाने की दिशा में कोई ठोस पहल आज तक नहीं की है। मसूरी शहर में अब हालात यह है कि किसी भी प्रकार की खेल गतिविधियां मालरोड में आयोजित की जाती हैं।