उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत कह चुके हैं कि यहां असली शराब की बोतलों पर लगने वाला होलोग्राम कमजोर है, जिसके चलते नकली शराब बिकने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में राज्य को भी राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।

इसके बावजूद आबकारी विभाग अपनी धुन पर चल रहा है और नया होलोग्राम तैयार नहीं कर पा रहा। फिलहाल चौथी बार होलोग्राम की टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, इससे पहले भी तीन बार टेंडर प्रक्रिया चली, लेकिन हर बार मामला लटक गया।

आबकारी विभाग की ओर से शराब की बोतलों पर एक होलोग्राम चिपकाया जाता है, जो शराब असली होने की तस्दीक करता है। इससे नकली शराब बेचने की आशंका नहीं रहती है। लगातार शिकायतें मिलती रही हैं कि आबकारी विभाग की ओर से लगाया जा रहा होलोग्राम कमजोर है। इसका डुप्लीकेट होलोग्राम तैयार कर नकली शराब बेचने की बातें भी सामने आई हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सरकार के समय भी होलोग्राम कमजोर होने और नया होलोग्राम बनाने की बात चली थी। तब दो बार टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई और फिर बीच में ही लटक गई। हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी एक बार टेंडर प्रक्रिया चली और फिर मामला लटक गया।

अब विभाग इस कवायद में एक बार फिर जुट गया है। आबकारी आयुक्त बृजेश कुमार संत का कहना है कि उन्होंने अभी चार्ज संभाला ही है। इस मामले को देखेंगे और जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।