उत्तराखंड में हिमालय की ऊंची पहाडियों पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर के कपाट रविवार तो शीतकाल के लिए बंद हो गए। रुद्रनाथ मंदिर समिति के प्रबंधक अनुसूया प्रसाद भट्ट ने बताया कि परंपरागत पूजा अर्चना के बाद पंचकेदार श्रृंखला के इस प्रसिद्ध तीर्थस्थल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।

उन्होंने बताया कि कपाट बंद होने से पूर्व भगवान शिव की समाधि पूजा सम्पन्न हुई और इस दौरान भभूति, जौ के बीज और बुखला नाम के हिमालयी फूलों का प्रयोग किया गया।

कपाट बंद होने के दौरान इस दुर्गम तीर्थ में बडी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। भट्ट ने बताया कि कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की डोली गोपेश्वर के लिए रवाना हो गई, जो 23 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद गोपीनाथ मन्दिर पहुंचेगी। कपाट बंद रहने के दौरान रुद्रनाथ की शीतकालीन पूजा गोपेश्वर के ऐतिहासिक गोपीनाथ मन्दिर में होती है।

उधर, भगवान की अगवानी के लिए गोपीनाथ मन्दिर परिसर को परम्परागत रूप से सजाया गया। श्री रुद्रनाथ की विशेष पूजा के लिए थालियों में जलता दीपक, नए अनाज और फलों के साथ सजाया गया था।

Rudranath-Temple

रुद्रनाथ मन्दिर पंचकेदार श्रृंखला का सबसे दुर्गम तीर्थस्थल माना जाता है और इसके बावजूद हर साल रुद्रनाथ मन्दिर में भगवान शिव के दर्शनों के लिए देश-विदेश से सैकडों तीर्थयात्री लम्बी पैदल यात्रा करके पहुंचते हैं।

केदारनाथ, तुंगनाथ और मध्यमहेश्वर के कपाट पहले खुल जाते हैं, जबकि रुद्रनाथ मन्दिर के कपाट सबसे बाद में खुलते हैं, लेकिन पंचकेदार श्रृंखला के इस तीर्थ के कपाट सबसे पहले बन्द हो जाते है। रुद्रनाथ मन्दिर में भगवान शिव के मूर्तिरूप में दर्शन होते हैं। गुफा मन्दिर में शिव के इन दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है।