उत्तराखंड में चाय उत्पादन को बढ़ाने के लिए चाय बागान क्षेत्र में बढ़ोत्तरी करने की शुरुआत कर दी गई है। इसके लिए रुद्रप्रयाग जिले के जखोली ब्लॉक में बागान लगाया जा रहा है। सरकार ने राज्य में करीब 600 हेक्टेयर चाय बागान क्षेत्र बढ़ाने की योजना तैयार की है, जिसके तहत ऑर्गेनिक चाय के उत्पादन को भी बढ़ाया जाएगा।

विकास की नई योजनाओं को आगे बढ़ा रही राज्य सरकार ने चाय बागान के विकास को लेकर भी कदम आगे बढ़ाए हैं। चाय उत्पादन के क्षेत्र में हालांकि उत्तराखंड का एक अलग मुकाम है, लेकिन चाय उत्पादन और ब्रांडिंग को लेकर लगातार बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की जाती रही है। जिसको मौजूदा सरकार ने समझते हुए कदम आगे बढ़ाए हैं। मौजूदा समय में राज्य में करीब 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय का बागान फैला है, जोकि अलग-अलग जिलों में है।

चाय बागानों से सालाना औसतन 40 हजार किलो चाय पत्ती हासिल होती है। अब राज्य सरकार चाय पत्ती उत्पादन को बढ़ाने के लिए नए बागान लगा रही है। इसमें रुद्रप्रयाग के जखोली ब्लॉक में चाय बागान लगाया जा रहा है। सरकार ने राज्य के विभिन्न जिलों में करीब 600 हेक्टेयर चाय बागान बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, पौड़ी, चमोली और रुद्रप्रयाग भी शामिल हैं।

मौजूदा समय में इन जिलों के कई क्षेत्रों सहित देहरादून के कुछ हिस्से में भी चाय के बागान हैं, लेकिन चाय के बागानों के बढ़ने से एक तरफ जहां चाय बागान का क्षेत्र बढ़कर डेढ़ हजार हेक्टेयर से ज्यादा हो जाएगा, वहीं चायपत्ती उत्पादन का आंकड़ा भी करीब डेढ़ गुना हो जाएगा।

चाय बागान का एक दूसरा फायदा ये माना जाता है कि ये चाय बागान से भूमि के कटाव की रोकथाम भी होती है। राज्य सरकार में उद्यान विभाग के मंत्री हरक सिंह रावत कहते हैं कि सरकार ऑर्गेनिक चाय के उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है, ताकि उत्तराखंड की चाय का एक अलग मुकाम हासिल हो सके।