उत्तराखंड में दालों की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने जहां केन्द्र सरकार के खिलाफ ‘अरहर पर चर्चा’ के जरिए मोर्चा खोल दिया है, वहीं नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट का कहना है कि कांग्रेस पार्टी दालों की कीमतों को लेकर सियासत कर रही है।

कांग्रेस का मनना है कि दालों की बेतहाशा बढ़ती कीमतों के लिए केन्द्र सरकार दोषी है, क्योंकि केन्द्र सरकार दालों की बढ़ती कीमतों की रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जिसका खामिजाया आम लोगों को महंगी दाल खरीद कर उठाना पड़ रही है।

वही बीजेपी ने कांग्रेस पर पटलवार कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि राज्य सरकार दाल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए जो कदम उठा रही है उसे बहुत पहले उठाना चाहिए था।

फिलहाल नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने दावा किया है कि उनकी विधानसभा क्षेत्र रानीखेत में बीजेपी कार्यकर्ता तीन दुकानों पर 60 रुपये प्रति किलो दाल, 24 रुपये प्रति किलो चीनी और 55 रुपये किलो बासमती का चावल बेच रहे हैं।

उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी दालों की बढ़ती कीमतों को लेकर बेवजह की सिसायत कर रही है, भट्ट का कहना है कि कांग्रेस पार्टी को भी मालूम है कि इस साल देश में दाल की पैदावार कम हुई है, जिसकी वजह से दालों की कीमतों में वृद्धि हुई है। केन्द्र सरकार लगातार दालों का आयात कर रही है, जिससे दालों की कीमतों में वृद्धि ना हो।

नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि कांग्रेस शासित राज्यों में ही दालों का ज्यादा संकट देखा जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि क्या राज्य में दालों की कालाबाजारी की जा रही है।

आखिर दालों की जब सप्लाई हो रही है तो इसका संकट क्यों बढ़ रहा है। फिलहाल अस्थायी राजधानी देहरादून में फुटकर दुकानदार अरहर की दाल 180 से 190 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के रसोई का बजट बिगड़ गया है।

दालों की कीमतों को लेकर हो रही सियासत से इतना साफ हो गया है कि इससे आम लोगों को कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। हां इतना जरूर है कि दालों के बढ़ती कीमतें लोगों के जेब को ढीली जरूर कर रही है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अरहर की दाल को मंडी समितियों के माध्म से बेचने का फैसला किया है, जिससे लोगों को थोक रेट पर दाल मिल सके। देहरादून में सरकार ने 145 रुपये प्रति किलो अरहर की दाल बेचने का आदेश जारी किया है।

राशन की दुकानों पर भी अरहर की दालों को बेचा जा रहा है। इससे आम लोगों को काफी राहत मिल सकती है, लेकिन जिस तरह से सियासत हो रही है ऐसे में आम लोगों को कोई राहत की किरण नजर नहीं आ रही है।

फिलहाल ये सियासत है इसे देखना भी काफी दिलचस्प होगा कि इससे आम लोगों को महंगाई से कितनी राहत मिलती है।