शरद ऋतु का आगम हो चुका है पहाडों में हर साल की तरह शीत ऋतु में सैलानियों को बुलाने के लिए शरदोत्सवों का आयोजन किया जाता रहा है। लेकिन इस बार पैसों की कमी और पिछला भुगतान ना होने के चलते नैनीताल के ऐतिहासिक ओटम फेस्टिवल पर संकट के बादल छाए हुए हैं।

शंका है कि नैनीताल में शरदोत्सव की तस्वीरें कहीं यादों में ही न रह जाएं। न तो इस बार स्टेज पर नामी कलाकार संगीत के सुर बांधेगे और न ही स्थानीय कलाकारों को मंच पर अपना हुनर दिखाने का मौका मिल पाएगा। दर्शकों के लिए तो न मंच होगा, न ही कलाकार।

दरअसल इस बार नैनीताल में आयोजित किए जाने वाले शरदोत्सव पैसों की कमी के चलते करना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं साल 2014 नैनीताल ओटम फेस्टिवल में दर्शकों को अपनी आवाज और मनमोहक प्रस्तुतियों से झकझोरने वाले कलाकारों को न तो पिछला पैसा मिला है और न ही पैसे मिलने की कोई उम्मीद बची है।

शरदोत्सव का आयोजन नगरपालिका और जिला प्रशासन करता है, जिसमें पालिका व्यवस्था का आयोजन करती है तो जिला प्रशासन पैसों का आवंटन। लेकिन कलाकारों का पिछला भुगतान न तो जिला प्रशासन ने किया, न ही पालिका ने। अब हालत ये हो गए हैं कि इस बार का शरदोत्सव होना नामुमकिन लग रहा है।

गौरतलब है कि पहाडों में ठंड के चलते पर्यटकों की कमी को दूर करने के लिए शरदोत्सव का आयोजन किया जाता है। हिन्दी गानों के साथ पर्यटकों को लोक संगीत का तड़का मिले इसके लिए सालों से नैनीताल में शरदोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि पैसों की कमी के चलते इस महोत्सव के आयोजन पर ही खतरा मंडरा रहा हो। इससे पहले भी दो बार नैनीताल महोत्सव में धन की कमी आडे आई थी, लेकिन पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी की कोशिशों से इसे दोबारा पटरी पर लाया गया था।

इस महोत्सव में न सिर्फ फिल्मी कलाकार दर्शकों का मन मोह लेते थे, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी मंच प्रदान किया जाता था। लेकिन पिछले साल के शरदोत्सव में करिब 25 लाख रुपये इवेन्ट मैनेजमेंट कम्पनी के चुकाने हैं तो स्थानीय कलाकरों को भी 30 लाख से ज्यादा की रखम दी जानी बाकी है।

नैनीताल के पालिका अघ्यक्ष श्याम नारायण ने साफ कर दिया है कि इस साल का महोत्सव पालिका करने में नाकाम है, क्योंकि पिछले साल के भुगतान के साथ पालिका को 1 करोड से ज्यादा की रकम की व्यवस्था करनी है, इसके साथ ही पालिका अघ्यक्ष ने कहा की जिला प्रशासन और सरकार को इस बाबत कई बार लिखा, लेकिन अब तक कोई भी राहत कहीं से नहीं मिली है।

वहीं राज्य में संस्कृति को बढ़ावा देने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी महोत्सव को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने भी साफ कर दिया है कि इस महोत्सव को स्थानीय प्रशासन और पालिका को ही आगे बढ़ाना चाहिए और इसके लिए जो भी दिक्कतें सामने आ रही है उनको दूर करने की जरूरत है।