उत्तराखंड में अब बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची है। जलवायु परिवर्तन और इको सिस्टम की सेहत के मद्देनजर अब राज्य में दो मेगावाट तक की परियोजनाओं को ही स्वीकृति मिल पाएगी।

राज्य जलवायु परिवर्तन की ताजा कार्ययोजना में यह व्यवस्था कर दी गई है। सरकार ऐसी कार्ययोजना तैयार करने में जुटी है जो अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन गाइडलाइन के अनुकूल हो। इससे संयुक्त राष्ट्र के ‘ग्रीन क्लाइमेट फंड’ से योजनाओं के लिए धनराशि मिल सकती है। इस फंड से प्रतिस्पर्धा के आधार पर आर्थिक सहायता दी जाती है।

केंद्र सरकार के निर्देश पर सरकार ने राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना तैयार की है। ग्राम्य एवं वन विकास आयुक्त एस. राजू की अध्यक्षता में सरकार में हुई बैठक के बाद इसे हरी झंडी दे दी गई है। कार्ययोजना को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इस कार्ययोजना में प्रमुख बिंदु जल विद्युत परियोजनाओं का है।

यह तय किया गया कि राज्य में दो मेगावाट से अधिक जल विद्युत परियोजनाओं को ही स्वीकृति दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार की गई जलवायु परिवर्तन गाइड लाइन के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है।

सरकार इस कार्ययोजना को संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में होने वाली जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर तैयार विभिन्न देशों के कार्ययोजनाओं की प्रतिस्पर्धा में शामिल करेगा। बेहतर कार्ययोजना को ग्रीन क्लाइमेट फंड से धन मिलेगा। यह फंड विभिन्न देशों ने मिलकर बनाया है।

इसके साथ ही वन, कृषि, जैव विविधता के अलावा राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना में जल संरक्षण योजनाओं को प्रमुखता से शामिल किया गया है। अपर मुख्य सचिव एस. राजू ने बताया कि प्रमुख बिंदु जल विद्युत परियोजनाओं और जल संरक्षण का है। कार्ययोजना तैयार हो गई है।

कार्ययोजना में ये बिंदु भी हैं शामिल
जैविक खेती, पौधारोपण, घास के मैदान (बुग्याल) का संरक्षण, चाल खाल द्वारा जल संरक्षण, समुदाय पर आधारित पर्यटन, सौर ऊर्जा, चारा उत्पादन, पशुओं में बीमारियों की रोकथाम, सड़क निर्माण आदि।