अगर आपसे पूछा जाए कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का नाम क्या है, तो आप कहेंगे आपको इतना भी नहीं पता तो आप यहां उत्तरांचल टुडे में क्या कर रहे हैं। दरअसल बात ही कुछ ऐसी है। हरीश रावत मुख्यमंत्री भले ही हों, लेकिन अस्थायी राजधानी देहरादून में उनकी एक नहीं चलती। जब उनकी चलती ही नहीं तो फिर मुख्यमंत्री होने न होने से क्या फर्क पड़ता है।

मुख्यमंत्री रावत अस्थायी राजधानी की सूरत बदलना चाहते हैं। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने और विकास, सुविधाएं बढ़ाने के लिए उनके दिमाग में कई योजनाएं हैं, लेकिन वह इन योजनाओं को धरातल पर नहीं उतार पा रहे हैं। मुख्यमंत्री की मानें तो नगर निगम उनकी बात सुनने को तैयार ही नहीं है।

शुक्रवार को एमडीडीए के शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने नगर निगम पर जमकर निशाना साधा। अप्रत्यक्ष तौर पर शहर में रुके विकास कार्यों और अव्यवस्थाओं के लिए निगम को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि नगर निगम शहर की बेहतरी के लिए काम नहीं कर रहा है।

अब ये तो नहीं पता कि निगम ही निकम्मा है या फिर मुख्यमंत्री अपनी और सरकार की कमियों को छिपाने के लिए निगम को बलि का बकरा बना रहे हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि शहर में बढ़ती गंदगी पर लगाम लगाने के लिए अंडर ग्राउंड डस्टबिन लगाने को कहा गया था, जो आज तक नहीं लगे। नगर निगम केवल क्रेडिट लेने का काम कर रहा है।

स्मार्ट सिटी के लिए भूमि तक चिह्नित नहीं करने वाले निगम ने बयानों में स्मार्ट सिटी तैयार तक कर ली है। शहर में स्मार्ट सिटी बनाने पर आभार जताने वाले बोर्ड तक लग गए हैं।